अमरोहा। पटाखा फैक्टरी विस्फोट में झुलसीं पूजा व मोना के पिता गिरीश कुमार ने बताया कि वह मजदूरी करते हैं। उनकी बड़ी लड़की पूजा और छोटी बेटी मोना दोनों ही अतरासी गांव में पटाखा फैक्टरी में काम करतीं थीं। पूजा फैक्टरी गेट के पीछे पैकिंग कर रही थी, जबकि मोना अंदर थी। वहीं, घायलों के मुताबिक फैक्टरी में करीब तीन दिन के तैयार पटाखों का स्टॉक रखा था, जिसकी वजह से इतना बड़ा विस्फोट हुआ।
पूजा ने बताया कि फैक्टरी में शादी या अन्य समारोहों के लिए आतिशबाजी तैयार हो रही थी। हादसे के समय वह फैक्टरी के पीछे वाले गेट की तरफ बैठी थी, जबकि विस्फोट आगे वाले गेट पर हुआ। धमाका इतना तेज था कि पूरी बिल्डिंग गिर गई। धमाका कैसे हुआ, यह तो मुझे नहीं पता। वहीं, घायलों में शामिल पूजा देवी ने बताया कि वह करीब 18-19 दिन से मजदूरी करने आ रही थी। हम फुलझड़ी वाले पटाखों में बारूद का मसाला भर रहे थे। इस दौरान अचानक धमाका हुआ। आंखों के सामने अंधेरा छा गया। होश आया तो बिल्डिंग ही गायब थी। मेरे शरीर के कपड़े जल चुके थे। शरीर से खून बह रहा था। मैंने सोचा कि इस हालत में कैसे भागूं। जैसे-तैसे मुझे एक दुपट्टा पड़ा मिला। उससे मैंने शरीर को ढका और पास के खेत में छिप गई। इसके बाद मदद के लिए आवाज लगाती रही। काफी देर बाद तीन-चार लोग मेरे पास आए। मैंने कहा कि पति को कॉल करके बुला लो। पति का मोबाइल बंद था। कुछ देर बाद पुलिस आई तब मुझे अस्पताल भिजवाया गया।
पूजा ने बताया कि इस फैक्टरी में जितने भी पटाखे तैयार होते हैं, रोजाना उनकी सप्लाई हो जाती है। विस्फोट से पहले दो-तीन दिन के पटाखों का स्टॉक रखा हुआ था। शायद बड़ा विस्फोट होने की एक वजह यह भी रही। अगर फैक्टरी में तैयार पटाखों की मात्रा कम होती तो विस्फोट भी इतना तेज नहीं होता और महिलाओं की जान बच जाती।
मां को खाना देने आई थी सलोनी
विस्फोट में झुलसी सलोनी अपनी मां पिंकी को खाना देने गई थी। उसी दौरान धमाका हुआ और पूरी फैक्टरी धराशायी हो गई। इसमें सलोनी बुरी तरह झुलस गई। सलोनी कक्षा नौ की छात्रा है। उसने बताया कि फैक्टरी में मल्टी स्काई शॉट बनाए जा रहे थे। इसमें तीन तरह का बारूद चम्मच से भरा जाता है, जिसके बाद लकड़ी की एक छोटी डंडी से स्काई शॉट के अंदर बारूद को कूटा जाता है, ताकि बारूद अच्छे से अंदर तक पहुंच जाए। एक महिला डंडी थोड़ा तेज मार रही थी। ठेकेदार ने उसको कई बार ऐसा करने से टोका, लेकिन वह बार-बार ऐसा करती रही। बारूद तेज ठोकने के कारण विस्फोट हुआ है। जब धमाका हुआ उस वक्त मेरा मुंह दूसरी तरफ था, इसलिए चेहरे पर मामूली चोटें आईं हैं। हादसे में सलोनी की मां पिंकी देवी भी घायल हैं। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी को कुछ नहीं होना चाहिए था।
सांस लेने में दिक्कत हुई और फिर बेहोश हो गया
घायल विशाल ने बताया कि वह पटाखों की पैकिंग कर रहा था। दूसरी साइड में ब्लास्ट हुआ और वह भी झुलस गया। मैंने भागने का प्रयास किया लेकिन बारूद का धुआं होने के कारण निकलने का रास्ता दिखाई नहीं दिया। सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी और बेहोश होकर गिर पड़ा। इस पटाखा फैक्टरी में पूजा गेट के पीछे पटाखों की पैकिंग कर रही थी। अचानक पटाखे फटे और उनसे निकली चिंगारी से हाथ जल गया। पूजा ने फैक्टरी के भीतर से भागने की कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली और उसका शरीर बुरी तरह झुलस गया।