चार महिलाओं की जिंदगी लील चुकी अतरासी गांव के पास चल रही पटाखा फैक्टरी में नियमों की अनदेखी की जा रही थी। फैक्टरी में नियमों के विपरीत रात में भी काम होता था। कोई कुशल कारीगर काम नहीं करता था। महिलाओं के अलावा बाल श्रमिकों से भी काम कराया जा रहा था।
फैक्टरी में विस्फोट मामले की मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनिल कुमार सिंह ने जांच-पड़ताल शुरू की। जांच में सामने आया कि पटाखा फैक्टरी में रात को भी काम होता था, जो नियम के विपरीत है। सीएफओ ने बताया कि दमकल विभाग के नियम के मुताबिक पटाखा फैक्टरी में दिन में ही काम किया जा सकता है।
इसके अलावा पटाखा फैैक्टरी या आतिशबाजी का काम अति संवेदनशील माना जाता है जिसे कुशल कारीगरों द्वारा ही किया जाना चाहिए, लेकिन फैक्टरी में महिलाओं के साथ ही बाल श्रमिकों द्वारा काम कराया जा रहा था। इनमें कोई कुशल कारीगर नहीं था। वहीं, जानकारी मिली है कि काम करने वाले कुछ कर्मचारी आसपास बीड़ी या सिगरेट भी पीते थे। सीएफओ का कहना है कि पटाखा फैक्टरी में कई नियमों की अनदेखी सामने आई है जिसकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है।