रामलीला प्रबंध समिति के कुछ लोग रामलीला मैदान के पास बनी तीन दुकानों को अपनी भूमि पर होने का दावा कर रहे थे। इन दुकानों का बैनामा पालिकाध्यक्ष के पास था। रविवार को पालिकाध्यक्ष ने रामलीला मंच पर समाज के सभी वर्गों के लोगों की खुली बैठक बुलाई। उन्होंने कहा कि यह भूमि उन्होंने सत्ताधारी पार्टी के ही एक व्यक्ति से 2016 में नौ लाख रुपये में खरीदी थी लेकिन उनको बदनाम करने के लिए अब वह भूमि रामलीला की बताई जाने लगी।
उन्होंने कहा कि मामला भगवान राम से जुड़ा है। वह स्वयं इस भूमि पर बनी तीन दुकानों व पीछे खाली पड़ी भूमि को छाेड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह खुद इन दुकानों को ध्वस्त कराएंगे। इस मौके पर भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष दानवीर सिंह, अनिल अग्रवाल, सेवा सिंह, चिंतामणि अग्रवाल, इंद्रपाल सिंह, बजरंग दल प्रमुख हेमंत सारस्वत, कमल अग्रवाल, भाजपा जिला उपाध्यक्ष शरद गर्ग आदि मौजूद रहे।
रामलीला समिति के चुनाव का मुद्दा उठा
मंडी धनौरा। बैठक में रामलीला समिति के चुनाव का मुद्दा भी जोर शोर से उठाया गया। लोगों ने चार साल बीत जाने के बाद भी चुनाव नहीं कराने पर तदर्थ कमेटी की आलोचना की। भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष दानवीर सिंह ने कहा कि धनौरा की रामलीला के मंचन की मिसाल दूर-दूर तक दी जाती है लेकिन वर्तमान में कमेटी पर काबिज लोग चुनाव नहीं करा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि तदर्थ कमेटी को मनमानी नहीं करने दी जाएगी। बजरंग दल के गोरक्षा प्रांत प्रमुख हेमंत सारस्वत ने भी कहा कि रामलीला समिति के चुनाव के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। बैठक में लोगों ने आजीवन सदस्यों द्वारा चुनी गई कमेटी का साथ देने की घोषणा की।