अमरोहा जिले और मुरादाबाद में इस बान नदी की लंबाई करीब 47 किलोमीटर है। यह नदी नौगांवा सादात, अमरोहा और कांठ तहसील क्षेत्र के 48 से अधिक गांवों से गुजरती है। इसके बाद यह नदी अमरोहा तहसील क्षेत्र के सिरसा मनिहार गांव में गांगन नदी में मिल जाती है। सूख चुकी बान नदी का अस्तित्व बचाने के लिए अब किसी भगीरथ की जरूरत है।
सरकार और प्रशासन गिरते जलस्तर को देखते हुए पानी सहजने के लिए तमाम प्रयत्न कर रहा है। तालाबों को अमृत सरोवर में तब्दील किया गया है, तो वहीं क्षेत्र के लोगों के लिए नहरों की खोदाई कराई जा रही है। लेकिन, जो नदियां पहले से मौजूद हैं उनका अस्तित्व मिट चुका है। उत्तराखंड के पहाड़ों से कई छोटी-छोटी नदियों का पानी बिजनौर जिले के निचले हिस्से में इकट्ठा होता था। जिसे सिलारा कहा जाता है। इन तमाम जलधाराओं का उद्गम हुआ। इसमें बान, सोत, बगद, मतवाली, छोइया आदि नदियां शामिल थीं, लेकिन पहाड़ों पर डैम बनाकर उनकी जलधारा को रोक दिया गया। जिले में गंगा को छोड़कर बाकी सभी नदियां सूख चुकी है।
वहीं, प्रशासन के कागजों में बह रही बान नदी का जमीनी अस्तित्व मिट चुका है। आलम यह है कि जिले के कई गांव में बान नदी अभिलेखों में दर्ज नहीं है, जहां दर्ज है तो वहां वर्तमान में फैसले खड़ी हैं। नदी क्षेत्र पर अतिक्रमण है। शहर व कस्बों के इर्द-गिर्द से निकल रही बान नदी पर अतिक्रमण करके इमारतें खड़ी कर ली गई हैं। बान नदी के विलुप्त हो जाने की सुध न तो जिला प्रशासन ने ली और न ही अन्य जिम्मेदारों ने। अब कब्जों में समाई बान नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए हम सबको भगीरथ बनने की जरूरत है। आओ हम सब मिलकर कब्जों में खोई बान नदी के अस्तित्व को बचाएं।
नौगांवा सादात के शिकरिया गांव से जिले में करती है प्रवेश
बान नदी बिजनौर जिले की तहसील चांदपुर के मालवा गांव से तहसील नौगांवा सादात के शिकरिया गांव से अमरोहा जिले में प्रवेश करती हैं। उत्तर-पश्चिम दिशा से दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर बहते हुए चक शिकरिया, फरीदपुर इम्मा, बस्तापुर, बिजडा, कायमपुर उर्फ करारनगर, तारापुर, मोहम्मदपुर मझरा, सिरसा जट, कैलबकरी, कुतुबपुर हमीदपुर, जब्बारपुर, सुल्तानपुर जहूर हसन, हाशमपुरी, मुवारकपुर कलां, शहजादपुर, बाकीपुर, शाहिदपुर, गजाना, उसमापुर, कासमपुर मेव और नौराहन से होकर तहसील अमरोहा के गांव पिलक सराय में प्रवेश करती है।
इसके बाद यह नदी अपने दक्षिणी छोर पर स्थित तहसील अमरोहा के राजस्व एवजाबाद, पट्टी रायपुर कलां, रायपुर कला, उकसी के बाद उत्तरी छोर पर स्थित तहसील नौगांवा सादात के गांव लालू नगला, मुनव्वरपुर उर्फ मुनीमपुर व बुडेरना में सर्पिलाकार पथ में बहते हुए दोबारा तहसील अमरोहा के गांव उकसी से प्रवाहित होकर तहसील कांठ जनपद मुरादाबाद के सहदौली गांव में प्रवेश करते हैं।
इसके बाद दोबारा तहसील अमरोहा के मऊमय चक गांव में प्रवेश करके एक बार फिर तहसील कांठ जनपद मुरादाबाद के गांव खंडसाल जुन्नारदार व जमनिया खुर्द से बहते हुए दोबारा तहसील अमरोहा के गांव हाजरपुर में प्रवेश करती है। यहां से नगली मीराशाह, सुल्तानपुर इन्तजाम अली खां, रसूलपुर मजरा मझोली, भटपुरा सकैनिया, अकबरपुर सकैनिया, मझौली, मझोला खुर्द, देवीपुरा, जलीलपुर बक्काल, फूलपुर अदलपुर, निजामपुर सैंदरी, तारूपुर दोयम, वारसपुरकला, मौहड़ी जट, लोदीपुर बंजारा, चककालीलेट, वाजिदपुर एवं तहसील अमरोहा के गांव सिरसा मनिहार तक प्रवाहित होती है। यह नदी तहसील अमरोहा के गांव सिरसा मनिहार में गांगन नदी में मिल जाती है। यह एक बरसाती नदी है।
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हमने अपने संगठन के माध्यम से कई बार बान नदी को पुनर्जीवित करने की मांग की है। बसतापुर गांव में हमने आरती का कार्यक्रम भी शुरू किया है। कांठ रोड से गुजरने पर स्थानीय लोगों ने बान नदी की जमीन पर फसलें उगा रखी हैं। इस स्थान से पश्चिम दिशा में लोगों ने नदी की जमीन पर खदान कर रखी है। नदी के रहते क्षेत्र के लोगों को फायदा था। सिंचाई करना भी बेहद आसान था। मऊ मयचक गांव में नहर के पुल का निर्माण बेहतर ढंग से नहीं हो पाया, जिस कारण पानी की निकासी में दिक्कत आती थी। अमर उजाला का ये अभियान सराहनीय है। हमारा संगठन जमीनी स्तर पर सहयोग प्रदान तैयार है।- पवन कुमार चौहान, गंगा समग्र राष्ट्रीय वृक्षारोपण प्रमुख
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बान नदी के बारे में हमें अधिक जानकारी नहीं है। बान नदी की जिले में क्या स्थिति है, इसके बारे में पता कर टीम मौके पर भेजा जाएगा। साथ ही कब्जे वाले स्थानों को चिन्हित कराया जाएगा। प्रशासनिक स्तर से प्रयास होगा कि नदी को पुराने स्वरूप में लौटाया जाए। निधि गुप्ता वत्स, डीएम