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Amroha News: र्वे के भंवर में फंसकर चक्कर काट रहे गन्ना किसान

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अमरोहा/ हसनपुर। गन्ने के सर्वे के भंवर में फंसकर किसान समितियों व मिलों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।। दरअसल, चीनी मिलों द्वारा कराए गए गन्ने के सर्वे में गड़बड़ियां अब सामने आ रही हैं। जिससे किसानों को समय से पर्चियां नहीं मिल पा रहीं हैं। जिससे गन्ना की कटाई में देरी हो रही है।
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जिले में 98 हजार हेक्टेयर जमीन पर गन्ने की खेती की जाती है। ऐसे में गन्ना जिले की मुख्य फसल है। मई-जून माह में शुगर मिलों द्वारा किसानों के खेतों में खड़ी गन्ने की फसलों का सर्वे किया गया था। जिसकी निगरानी गन्ना समिति द्वारा की गई। किसानों का आरोप है कि सर्वे के दौरान गड़बड़ी की गई है। कई किसानों के गन्ने की पौध (नौलख) को पेड़ी और पेड़ी को पौधे में दर्शा दिया गया। अब जैसे ही गन्ना का सीजन पीक पर आया तो किसानों को समय पर पर्चियां नहीं मिल पा रही है। गन्ना कटाई और छिलाई भी समय पर नहीं होने से उन्हें गेहूं की बुवाई की परेशानी सताने लगी है। किसान संगठन भी सर्वे संशोधन की मांग समय से करते आ रहे हैं। लेकिन इसके बाद भी सुधार नहीं हो रहा है।
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वेबसाइट भी नहीं दे रही साथ
सर्वे संशोधन के लिए किसानों को गन्ना विभाग की वेबसाइट भी साथ नहीं दे रही है। पिछले चार दिन से वेबसाइट ठप होने से संशोधन के लिए पहुंचने वाले किसानों को मायूस होकर लौटने को विवश होना पड़ रहा है।
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जिले में गन्ना खरीदती हैं नौ शुगर मिलें
जिले में बड़ी संख्या में किसान गन्ने की खेती करते हैं। जिले में केवल तीन शुगर मिलें ही स्थापित हैं, लेकिन बिजनौर, मुरादाबाद एवं रामपुर जिले समेत नौ शुगर मिलें यहां के किसानों का गन्ना खरीदती हैं।

कोल्हू पर गन्ना देने को विवश होंगे किसान
किसानों का कहना है कि समय से सर्वे में संशोधन न किया गया तो खेत खाली करने के लिए उन्हें औने-पौने दामाें पर गन्ना कोल्हुओं पर बेचने को विवश होना पड़ेगा। जिससे उनको भारी आर्थिक हानि उठानी पड़ेगी। ऐसा न करने से उनकी गेहूं की बुवाई भी प्रभावित होगी।
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ईआरपी सिस्टम बना परेशानी का सबब, करेंगे आंदोलन
भारतीय किसान यूनियन शंकर के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी दिवाकर सिंह कहा है कि ईआरपी (इंटरपाइजेज रिसोर्स प्लानिंग) सिस्टम उच्चाधिकारियों के इशारे पर काम करता है। निचले स्तर के अधिकारी एवं कर्मचारी चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते हैं। जिसके चलते किसानों का सर्वे दुरुस्त नहीं हो पाया है। इसके लिए भाकियू शंकर सात दिसंबर को आंदोलन भी करेगा।
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किसानों के साथ अन्याय किया जा रहा है। जिन किसानाें के पेड़ी को पौधा में दर्ज किया गया है। वह अब अपना गन्ना कोल्हू पर बेचने को मजबूर हैं। कृष्ण कुमार शर्मा, जिलाध्यक्ष भारतीय किसान संघ

गन्ना सर्वे को लेकर परेशानी उठानी पड़ रही है। वह कई बार गन्ना समिति में समस्या ठीक कराने को लेकर चक्कर काट चुके हैं। लेकिन समस्या फिर भी जस की तस बनी हुई है। जयवीर सिंह, निवासी भदौरा, हसनपुर


किसानों की समस्याओं को लेकर विभाग गंभीर नहीं है। खेत खाली नहीं होने से गेहूं की बुवाई का संकट पैदा हो जाएगा। सर्वे ठीक कराने के लिए कई बार दफ्तर गए, लेकिन वेबसाइट काम नहीं करने से गड़बड़ी ठीक नहीं हो सकी। मनवीर सिंह, किसान ग्राम भदौरा हसनपुर


किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। अब तक लगभग साढ़े तीन हजार शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है। वेबसाइट बंद होने के कारण परेशानी हो रही है। शेष किसानों की शिकायतों का भी जल्द समाधान कर दिया जाएगा। -मनोज कुमार, जिला गन्ना अधिकारी

मजबूरी में गन्ने की कराई जा रही धुलाई
गजरौला। इस बार गंगा में आई भीषण बाढ़ ने कहर बरपाया। दो महीने तक खेतों में चार से पांच फीट पानी भरा रहा। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गन्ने की फसल पर मिट्टी चिपक रही है। किसान बिना धुलवाए चीनी मिल पर ले जाते हैं तो गन्ना लदी ट्रैक्टर ट्रॉली को मिल पर वापस कर दिया जाता है। मजबूरी में किसान रास्ते में पड़ रहे फव्वारों पर गन्ना धुलवाकर ले जा रहे हैं। चंदनपुर मिल को जाने वाले किसान तीसरा मिल, बुरावली, जयतौली, जबकि दारानगर, अलीनगर, मुरादपुर के किसान नगलिया अड्डे या नौनेर में धुलवा कर मिल को ले जाते हैं।
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