उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार में संविधान में दी गई नागरिकों को बोलने की आजादी के अधिकार का हनन किया जा रहा है। जबकि, देश की न्यायपालिका ने हर दौर में गणतंत्र की रक्षा की है।
नौगांवा सादात विधानसभा सीट पर तीन नवंबर 2020 को उपचुनाव के लिए मतदान हुआ था। चुनाव आयोग के दिशा-निर्देश पर अनुसार एक नवंबर की शाम पांच बजे के बाद चुनाव प्रचार पर पूर्ण पाबंदी थी। लेकिन, मेरठ निवासी व वर्तमान सरधना विधायक अतुल प्रधान अपने 10-12 समर्थकों के साथ समय बीतने के बाद भी गांवों में घूमकर समाजवादी पार्टी के पक्ष में प्रचार कर रहे थे। अतुल प्रधान उस समय समाजवादी छात्रसभा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हुआ करते थे। मौके पर पहुंची पुलिस ने उन्हें नन्हेड़ा से जमपुरी बमनिया के पास प्रचार करते पकड़ लिया था।
इस दौरान पुलिस और अतुल प्रधान के बीच नोकझोंक भी हुई थी। दो नवंबर 2020 को मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष सुरेश चंद्र गौतम ने आचार संहिता के उल्लंघन में अतुल प्रधान और उनके 10-12 अज्ञात समर्थकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था।
दोपहर करीब 12:30 बजे कोर्ट में पेश हुए
मामले की सुनवाई एसीजीएम द्वितीय अवधेश कुमार तृतीय की अदालत में चल रही थी। बुधवार को सरधना विधायक अतुल प्रधान आचार संहिता उल्लंघन के मामले में आत्मसमर्पण करने पहुंचे। अपने अधिवक्ता आरिफ मलिक के माध्यम से करीब 12:30 बजे न्यायालय में पेश हुए। यहां न्यायालय ने विधायक अतुल प्रधान को ढाई घंटे न्यायिक हिरासत में रखा और बाद में बीस-बीस हजार के दो जमानती व उतनी ही धनराशि का व्यक्तिगत मुचलका दाखिल करने पर जमानत दे दी है।