फ्लैग- कोविड और लॉकडाउन उल्लंघन के मुकदमे वापसी का मामला
हेडिंग-मुकदमे का दाग हटने से आसान होगी नौकरी की चाह रखने वाले युवाओं की राह
संवाद न्यूज एजेंसी
अमरोहा। कोविड-19 और लॉकडाउन उल्लंघन के मुकदमा वापस होने से सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले सैकड़ों युवाओं को बड़ी राहत मिलेगी। जिलेभर में दर्ज 622 मुकदमों में सैकड़ों ऐसे युवा भी घिर गए थे, जो पढ़ाई पूरी करके सरकारी नौकरी में जाना चाहते हैं। जाने-अंजाने लॉकडाउन के उल्लंघन में नामजद होने से केस का दाग उनकी भविष्य की योजना में आड़े आ सकता था।
वैश्विक महामारी कोविड-19 के संक्रमण की रोकथाम के लिए संपूर्ण लॉकडाउन घोषित किया गया था। दो गज की दूरी...मास्क है जरूरी के मुहिम के साथ लोगों को घरों में कैद रहने की हिदायत दी गई थी। जनपद में धारा 144 घोषित थी। डब्ल्यूएचओ और सरकार की गाइड लाइन का उल्लंघन करने वालों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ कोविड-19 संक्रमण फैलाने (महामारी अधिनियम) और लॉकडाउन (धारा 144 ) के उल्लंघन के की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। जनपद के अमरोहा देहात, अमरोहा नगर, आदमपुर, गजरौला, डिडौली, नौगांवा सादात, बछरायूं मंडी धनौरा रजबपुर सैदनगली हसनपुर समेत ग्यारह थानों में 22 मार्च 2020 से लेकर 13 फरवरी तक 2519 लोगों के खिलाफ 622 एफआईआर दर्ज की गई थीं। इस दौरान 2458 लोगों को गिरफ्तार कर धारा 41 का नोटिस तामील कराया गया था। पुलिस इस सभी मुकदमों से संबंधित आरोप पत्र न्यायालय दाखिल कर चुकी है। शनिवार को सूबे की योगी सरकार ने कोविड-19 और लॉकडाउन उल्लंघन में आम लोगों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने का फैसला लिया है। खास बात है कि नामजद 2519 लोगों में सैकड़ों युवा भी लॉकडाउन के उल्लंघन में फंस गए थे। वे पढ़ाई पूरी करने के साथ विभिन्न सेक्टरों में सरकारी नौकरी करने की चाह रखते है।
एएसपी अजय प्रताप सिंह ने बताया कि सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले छात्रों या युवाओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज होने से उनके लिए दिक्कत होना स्वाभाविक है। सरकारी नौकारी के लिए चरित्र प्रमाणपत्र बनता है, इसके लिए पुलिस वेरिफिकेशन होती है। अब मुकदमा वापस होने के बाद सभी लोग दोषमुक्त हो जाएंगे। जिसके बाद उन्हें सरकारी हो या गैर सरकारी किसी भी नौकरी में दिक्कत नहीं आएगी।
मुकदमा दर्ज होने से नहीं होते यह काम
. सरकारी नौकरी
. शस्त्र लाइसेंस
. ठेकेदारी का लाइसेंस
. वीजा-पासपोर्ट
बर्बाद होने से बचेगा छात्रों कॅरियर
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लॉकडाउन के दौरान आम लोगों के साथ कई छात्रों पर भी मुकदमे दर्ज हुए थे। इन मुकदमों के कारण सरकारी नौकरियों की तैयारी में लगे छात्रों को परेशानी तय थी। चूंकि नौकरी के लिए चरित्र प्रमाणपत्र की आवश्यकता पड़ती है, जो मुकदमा होने के कारण मिलना मुश्किल था। मुकदमे वापस होने कई छात्रों का कॅरियर बर्बाद होने से बच जाएगा।- मोहम्मद दानिश, छात्र
जनहित में बड़ा कदम
लॉकडाउन उल्लंघन में व्यापारियों, छात्रों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेकर सरकार ने जनहित में बड़ा सराहनीय कदम उठाया है। अभियोग छोटा हो या बड़ा उसका चरित्र पर प्रभाव पड़ता है। सरकार के इस कदम से छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। वह सरकारी नौकरी तक का सफर तय कर सकेंगे।-अनिल कुमार, छात्र
रिपोर्ट दर्ज होना भी अति आवश्यक, वापस लेना सराहनीय कदम
कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन का कड़ाई से पालन कराने के लिए परिस्थितियों को देखते हुए अभियोग दर्ज किए जाना अति आवश्यक था। सख्ती जरूरी थी, लेकिन अब योगी सरकार के उन अभियोगों को वापस लेने के निर्णय से जिले के नागरिकों को बड़ी राहत मिली है, जोकि सरकार का सराहनीय कदम है। -इफ्तेखार सैफी, एडवोकेट
युवा होगा बेदाग तभी देश-प्रदेश का विकास संभव
युवाओं के लिए सरकार का बेहद सकारात्मक कदम है। सरकार हर क्षेत्र में युवाओं को तवज्जो दे रही है। अगर युवा बेदाग होंगे तभी देश और प्रदेश का विकास संभव है। जिसके ऊपर मुकदमे लगते हैं तो वह मानसिक रूप से पिछड़ जाता है। कई बार उन्हें सरकारी योजना में लाभ नहीं मिल पाता है। नौकरी के लिए चरित्र प्रमाण पत्र अनिवार्य होता है। इसलिए उन्हें नौकरी भी नहीं मिल सकती है।
- नूर हसन, जिला क्रीड़ा अधिकारी, अमरोहा