अमरोहा। घटना 12 साल पहले की है, जब एक महिला ने तीसरे पति के खरीदे प्लॉट के बैनामे में पहले पति का नाम दर्ज करा दिया। तीसरे पति ने इसका विरोध किया तो महिला ने शातिराना अंदाज में तलाक दे चुकी दूसरी पति मिलकर मौजूदा तीसरे पति की गोली मारकर हत्या कर दी और शव चादर में लपेटकर जंगल में फेंक दिया था। 15 दिन बाद शव की पहचान हुई तो हर कोई अचंभित रह गया। कोर्ट ने हत्यारोपी पत्नी और उसके दूसरे पति को उम्रकैद की सजा हुई थी।
साल 2013 में आदमपुर थानाक्षेत्र के जंगल में चादर में लिपटा शव मिला था। मृतक के सिर पर गोली लगने का निशान था। हत्या दूसरी जगह करने के बाद शव को फेंका गया। इस मामले में खेत मालिक विक्रम सिंह ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा आदमपुर थाना (वर्तमान में रहरा थाना) में दर्ज कराया था। करीब 15 दिन बाद मृतक की पहचान दिल्ली निवासी मुस्तकीम अहमद के रूप में हुई थी। मुस्तकीम अहमद मुरादाबाद के कटघर थानाक्षेत्र के रहमत नगर में किराये के मकान में रहते थे, जबकि उसकी पहली पत्नी शबनम और बच्चे दिल्ली में रहते थे।
16 मार्च 2013 को मुस्तकीम अहमद पत्नी शबनम व बच्चों के पास से मुरादाबाद आए थे। इसके बाद वह गायब हो गए। आठ अप्रैल 2013 को मुस्तकीम की पत्नी शबनम ने फोन पर संपर्क किया तो बात नहीं बात नहीं हुई। मुस्तकीम का फोन बंद आ रहा था। 15 अप्रैल 2013 को शबनम देवर नईम अहमद के साथ मुरादाबाद के कटघर स्थित मकान पर पहुंचीं। यहां खाना बनाने वाली रहमत जहां से जानकारी की तो उसने 17 मार्च 2013 को मुस्तकीम के काम पर जाने की बात बताई। इसके बाद शबनम और नईम मुरादाबाद के कटघर थाना पहुंचे तो यहां एक पंपलेंट में मुस्तकीम की फोटो चस्पा देखकर हैरत में पड़ गए। पुलिस से जानकारी मिलने के बाद शबनम और नईम अहमद आदमपुर थाने पहुंचे। यहां पता चला कि मुस्तकीम की हत्या कर दी गई है। पहली पत्नी शबनम और भाई नईम ने कपड़ों से मुस्तकीम की पहचान की थी।
मुस्तकीम के घर पर खाना बनाती थी रहमत जहां
पुलिस की जांच में सामने आया था कि घर पर खाना बनाने वाली रहमत जहां से मुस्तकीम ने शादी कर रखी थी, जबकि रहमत जहां के पहले पति का नाम हनीफ है और इसके बाद रहमत जहां ने साल 2006 में मिंजार से दूसरा विवाह किया था। वहीं साल 2010 में मिंजार से तलाक के बाद रहमत जहां मुस्तकीम के संपर्क में आई थी।
मुस्तकीम ने खरीदे प्लॉट के बैनामे में रहमत ने दर्ज करा दिया था पहले पति का नाम
हत्या के बाद रहमत जहां से मिले आधार कार्ड में उसके पति का नाम मुस्तकीम अंकित था, लेकिन पुलिस की जांच में सामने आया कि मुस्तकीम ने रहमत जहां के नाम पर मुरादाबाद में एक प्लॉट खरीदा था। इस प्लॉट को रहमत जहां ने बैनामे में अपने पहले पति हनीफ का नाम अंकित करा दिया था। जिसे लेकर मुस्तकीम और रहमत जहां के बीच विवाद हो गया था। बस इसी बात को लेकर रहमत जहां ने अपने दूसरे पति मिंजार से मिलकर मुस्तकीम की हत्या की साजिश रच डाली थी। बाद में दोनों ने मुस्तकीम की गोली मारकर हत्या कर दी और शव को चादर में लपेटकर रहरा थानाक्षेत्र के जंगल में फेंक दिया था।
रहमत जहां और उसके दूसरे पति मिंजार को मिली उम्रकैद
सनसनीखेज वारदात हत्याकांड का खुलासा करने के बाद पुलिस ने रहमत जहां और उसके दूसरे पति मिंजार को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया था। इसके बाद दोनों जमानत पर जेल से बाहर आ गए थे। इसके बाद न्यायालय ने मुकदमे में सुनवाई की और साक्ष्य व सबूतों के आधार पर मृतक की पत्नी रहमत जहां और उसके दूसरे पति मिंजार को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। साथ ही दोनों पर एक लाख का जुर्माना लगाया था।