अमरोहा। श्रीमद दयानंद कन्या गुरुकुल महाविद्यालय में पिछले तीन सप्ताह से आयोजित व्याकरण की राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन हो गया। विभिन्न संस्थाओं से आए हुए विशिष्ट विशेषज्ञों की उपस्थिति में कार्यशाला की शुरुआत सात जुलाई को हुई थी। कार्यशाला में छात्राओं द्वारा विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। कार्यशाला में मुख्य अतिथि रहीं डॉ. पुष्पा दीक्षित ने कहा कि शास्त्र संरक्षण में ही देश की रक्षा है।
इसमें कुमारी श्रेष्ठा, आचार्य प्रथम वर्ष की छात्रा ने अपने भाषण में पौष्पी प्रक्रिया के महत्व को प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि व्याकरण को सीखने की इससे ज्यादा सरल कोई परिपाटी नहीं हो सकती। वहीं, शास्त्री द्वितीय वर्ष की छात्रा राधिका ने लुङ्लकार की कठिन प्रक्रिया को केवल पांच मिनट में ही प्रस्तुत कर दिखाया। आचार्य प्रथम वर्ष की ही छात्रा अदिति ने इस संपूर्ण सत्र के कक्षाओं के अनुभव को बड़े ही सुनाकर सभी को मुग्ध कर दिया।
लखनऊ परिसर की छात्रा शिखा ने इस प्रकार की कक्षाओं से होने वाले लाभ और भविष्य में छात्रों को प्राप्त करने योग्य प्रेरणा को एक कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि डॉ. पुष्पा दीक्षित ने कहा कि धरती का नाम राष्ट्र नहीं है बल्कि वहां की संस्कृति का नाम राष्ट्र है। यदि देश को सुरक्षित रखना है तो शास्त्रों को सुरक्षित रखना होगा क्योंकि शास्त्र संरक्षण में ही देश की रक्षा है।
गुरुकुल की प्राचार्या डॉ. सुमेधा ने कहा कि 83 वर्ष की आयु में माता पुष्पा दीक्षित की भारतीय संस्कृति और शास्त्रों को संरक्षित करने की लगन प्रशंसनीय है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सविता ने किया। इस दौरान मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय योजना निदेशक, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली के प्रो. मधुकेश्वर भट्ट, डॉ. शिवकुमार प्राचार्य, गुरुकुल ततारपुर व कुशलदेव, गुरुकुल ततारपुर के साथ-साथ अन्य अतिथि भी उपस्थित रहे।