जनपद की चारों विधानसभा सीटों पर मुस्लिम बहुल इलाके में एआईएमआईएम व पीस पार्टी के प्रत्याशी अन्य पार्टियों के उम्मीदवारों का गणित बिगाड़ेंगे। चारों विधानसभा की सीटें उनसे प्रभावित होंगी। मुस्लिम मतदाताओं के ध्रुवीकरण का नुकसान जहां सपा व बसपा को होना लाजमी है, वहीं भाजपा को फायदा मिलेगा। इनमें से एक पार्टी ने अपने प्रत्याशी को मैदान में उतारा है, जबकि दूसरी ने अभी पत्ता नहीं खोला है। शायद उसको अन्य पार्टियों के उम्मीदवार घोषित होने या फिर गठबंधन का इंतजार है।
जिले में चार विधानसभाएं हैं, जिन पर चुनाव लड़ा जाएगा। इनमें धनौरा, अमरोहा, नौगावां सादात व हसनपुर विधानसभा शामिल हैं। प्रत्येक विधानसभा में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है। इनमें धनौरा विधानसभा में करीब 18.25 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं। नौगावां सादात में 32.50, अमरोहा विधानसभा में 64.1 प्रतिशत व हसनपुर में 32.75 प्रतिशत मुस्लिम वोटर हैं। चुनाव में उनका ध्रुवीकरण होना संभव है।
अमरोहा विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी ने जहां नौशाद अली को प्रत्याशी घोषित किया है वहीं एआईएमआईएम ने शमीम अहमद तुर्क को। समाजवादी पार्टी के संभावित प्रत्याशी के रूप में कैबिनेट मंत्री महबूब अली द्वारा क्षेत्र में जोरशोर से प्रचार कर रहे हैं। अन्य पार्टियों ने अपने प्रत्याशियों का खुलासा फिलहाल नहीं किया है।
हालांकि प्रत्येक विधानसभा में एआईएमआईएम व फीस पार्टी के प्रत्याशी अन्य पार्टियों के उम्मीदवारों का खेल बिगाड़ने का काम करेंगे। यहां बता दें कि बसपा प्रत्याशी पहले विस चुनाव में पीस पार्टी में रहकर अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। उनको लगभग 30 हजार वोट मिले थे। इस बार पीस पार्टी ने अपना कोई चेहरा मैदान में नहीं उतारा है। लगता है वह गठबंधन की बाट जोह रही है।