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‘शोभायात्रा की अनुमति नहीं देना पुलिस-प्रशासनिक तानाशाही’

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अमरोहा के मोहल्ला कोट में बैठक करते श्रीधार्मिक रामडोल कमेटी के पदाधिकारी। - फोटो : JPNAGAR
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अमरोहा। श्री धार्मिक रामडोल कमेटी के पदाधिकारियों ने रामडोल शोभायात्रा के रथ को रोकना पुलिस प्रशासन का तानाशाही रवैया बताया है। कहा कि कमेटी के ग्यारह पदाधिकारी एक रथ निकालना चाहते थे। लेकिन कोविड-19 के बहाने अनुमति नहीं दी गई। जबकि हसनपुर और सैदनगली में सत्ताधारी नेताओं की सरपरस्ती में रामडोल शोभायात्रा निकाली गई। पुलिस-प्रशासन का दोहरे रवैया को लेकर कमेटी ने नाराजगी व्यक्त की है।
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बुधवार को मोहल्ला कोट स्थति अपने आवास पर पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए अध्यक्ष पंडित कपिल शर्मा ने कहा कि पुलिस प्रशासन ने अपने तानाशाही रवैया का परिचय देते हुए 114 वर्षों पुरानी एतिहासिक और दर्शनीय भव्य रामडोल शोभायात्रा के लिए कमेटी के 11 सदस्यों के साथ रथ निकालने की अनुमति नहीं देकर भेदभाव और दोहरे मापदंड का कार्य किया है। जबकि हसनपुर और सैदनगली में रामडोल शोभायात्रा सत्ताधारी नेताओं की सरपरस्ती में निकाली गई हैं। आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन शोभायात्रा निकालने के संबंध में अंतिम समय तक कमेटी के पदाधिकारियों को झूठा आश्वासन देता रहा और अंतिम समय में शोभायात्रा निकालने की अनुमति नहीं दी गई। इससे कमेटी के और समस्त हिंदुओं में रोष है। ऐसा करके पुलिस प्रशासन ने रामडोल कमेटी और अमरोहा के समस्त हिंदू धार्मिक आस्था और विश्वास पर भी कुठाराघात किया है। जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस दौरान मनोज अग्रवाल, पियूष शर्मा, विशाल टंडन, अजय चतुर्वेदी, कुंवर विनीत अग्रवाल, देव गौतम, विवेक शर्मा, राज शर्मा, संजीव गोयल, अनुज शर्मा, प्रदीप शर्मा, संजय गर्ग, अचल अग्रवाल, मनोज महेश्वरी, दीपक बंसल, रिशु दीक्षित, वासु दीक्षित, विकास त्रिवेदी, अर्पण कौशल, सचिन त्रिवेदी, सुभाष शर्मा आदि पदाधिकारी मौजूद रहे।
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