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मनरेगा फर्जीवाड़ा : अधूरे अभिलेख होने पर भी भुगतान कर फंसीं बीडीओ

Thu, 03 Apr 2025 02:09 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
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अमरोहा।
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पलौला गांव में हुए मनरेगा फर्जीवाड़े की जांच आखिरकार एक सप्ताह बाद पूरी हो गई। कमेटी ने रिपोर्ट डीएम को सौंप दी। जिसमें बीडीओ व ग्राम प्रधान समेत कुल 11 लोगों को फर्जीवाड़े का दोषी माना गया है। तत्कालीन बीडीओ रहीं प्रतिभा अग्रवाल अभिलेख अधूरे होने के बाद भी भुगतान कर मामले में फंस गई हैं। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई को ग्राम्य विकास आयुक्त को लिखा जाएगा।
जोया ब्लॉक का गांव पलौला पिछले दिनों से लगातार चर्चाओं में बना है। वजह, क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बहन शबीना व बहनोई गजनबी के परिवार द्वारा गलत तरीके से बिना काम किए मनरेगा की मजदूरी की रकम लेना है। मामले की जांच की जद में एक बीडीओ समेत कई कर्मचारी आ गए हैं। जांच के दौरान कमेटी पिछले एक सप्ताह से चार सालों के रिकॉर्ड खंगाल रही थी। कमेटी ने फर्जीवाड़े में एक बीडीओ प्रतिभा अग्रवाल को भी दोषी माना है। प्रतिभा अग्रवाल ने अधूरे अभिलेख होने के बाद भी भुगतान कर दिया था। इसके लिए बीडीओ को दोषी माना गया है। इसके पूर्ववर्ती बीडीओ को पत्रावली पूरी होने के कारण दोषी नहीं माना गया है।
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जिसके लिए डीएम ने प्रतिभा खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा तत्कालीन सचिव रहे पृथ्वी सिंह, हुमा व अंजुम, रोजगार सेवक झम्मन लाल, तकनीकी सहायक अजय निमेष, एपीओ ब्रजभान सिंह, लेखाकार विजेंद्र सिंह, कंप्यूटर ऑपरेटर शराफत भी जांच में दोषी मिले हैं। जिन पर विभागीय कार्रवाई के साथ एफआईआर दर्ज कराए जाने के निर्देश दिए गए है। इसके अलावा वर्तमान सचिव को भी दोषी माना है। उनके समय में गुले आयशा के परिवार के चार लोगों के जॉब कार्ड निरस्त किए गए और कुछ काम काम भी किया गया, लेकिन भुगतान न होने के कारण उन पर केवल विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। डीएम के निर्देश पर दोषी कर्मचारियों पर निलंबन की तलवार भी लटक गई है।
यह था पूरा मामला
जोया ब्लॉक के गांव पलौला में क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बहन शबीना की सास गुले आयशा पत्नी शकील अहमद ग्राम प्रधान हैं। वह 2021 में हुए चुनाव में चुनी गईं थी। इससे पहले भी उनके परिवार में उनके पति व ससुर ग्राम प्रधान रहे हैं। प्रधान बनने से पहले ही उनके बेटे और क्रिकेटर शमी के बहनोई गजनबी समेत परिवार के आठ व कई अन्य लोगों के गलत तरीके से जॉब कार्ड बनवा दिए गए। जनवरी 2021 में यह सभी जॉब कार्ड बनवाए गए थे। इसके बाद जुलाई 2021 से लगातार मनरेगा में काम करना दर्शाते हुए परिवार के लोगों ने 4.55 लाख रुपये समेत अन्य लोगों द्वारा कुल 8.68 लाख रुपये की मजदूरी ले ली गई। जबकि मौके पर काम किए जाने का साक्ष्य कोई भी नहीं दे पाया। एक सप्ताह पहले मामला सुर्खियों में आया तो डीएम निधि गुप्ता वत्स ने मामले की जांच परियोजना निदेशक व डीसी मनरेगा अमरेंद्र प्रताप सिंह को सौंपी थी। एक दिन बाद गांव के कुछ लोगों ने भी कलक्ट्रेट में पहुंचकर डीएम से प्रधान द्वारा और भी कई लोगों को मनरेगा का लाभ दिए जाने की शिकायत की थी। कमेटी ने हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच की। गांव पहुंच कर लोगों से मौखिक बयान भी दर्ज किए। हालांकि, इस दौरान प्रधान के परिवार का कोई सदस्य जांच टीम के सामने नहीं पहुंचा। लेकिन, दोनों पक्षों के लोग मौके पर मौजूद रहे तथा अपनी-अपनी बातें रखी। जांच कमेटी की ओर से सभी के मौखिक बयान दर्ज किए गए। इसके बाद सभी रिकॉर्ड को खंगालते हुए जांच को अंजाम तक पहुंचाया।


जांच में केवल प्रधान को माना दोषी
जांच कमेटी ने पूरे प्रकरण में सिर्फ प्रधान गुले आयशा को दोषी माना है। जबकि, फर्जीवाड़े का पूरा सूत्रधार उनका बेटा व क्रिकेटर मोहम्मद शमी का बहनोई गजनबी बताया जा रहा है। गजनबी द्वारा ही अपना रौब गालिब कर मौके पर लोगों की हाजिरी लगाई जाती थी। सभी का जॉब कार्ड बनवाए जाने में भी गजनबी की ही भूमिका बताई जा रही है, लेकिन जांच में गजनबी को क्लीन चिट दे दी गई है। वहीं, मामले में प्रधान को ही दोषी माना गया है। जिसके चलते उनसे सभी के द्वारा ली गई मनरेगा मजदूरी के 8.68 लाख रुपये की रिकवरी की जाएगी। साथ ही उनके अधिकार सीज करने की कार्रवाई भी होगी। वहीं, दोषी मिले सभी कर्मचारियों ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन ठीक से नहीं किया। जिससे सरकारी धन की बड़ा दुरुपयोग सामने आया।
जांच के दौरान कटे तीन बहनों के नाम
ग्राम प्रधान गुले आयशा के परिवार के आठ लोग मनरेगा मजदूरी का बिना काम किए लाभ ले रहे थे। पिछले वर्ष जुलाई माह में इनमें से पांच लोगों के जॉब कार्ड निरस्त कर दिए गए थे। यह कार्रवाई सीडीओ अश्वनी कुमार मिश्रा के निर्देश पर पूरे जिले में की गई थी। इसमें पलौला में भी 32 जॉब कार्ड निरस्त हुए थे, लेकिन प्रधान की तीन बेटियों के नाम उस समय निरस्त नहीं किए गए थे। अब मामले की जांच शुरू हुई तो उनके नाम भी सामने आए। जिसके बाद तीनों के जॉब कार्ड को निरस्त कर दिया गया। तीन बहनों में एक बहन की शादी भी हो चुकी है।
पंचायत से लेकर ब्लॉक स्तर तक हुई लापरवाही
यूं तो मनरेगा को लेकर कई पंचायतों में गड़बड़ी का खेल सामने आता रहा है, लेकिन पलौला में हुए इस फर्जीवाड़े में छोटी से लेकर बड़ी कड़ी तक की लापरवाही सामने आई है। पंचायत स्तर से लेकर मनरेगा योजना के लिए जिम्मेदार सभी कर्मचारियों ने लापरवाही बरती। जिससे फर्जीवाड़े का बड़ा खेल सामने आया है। इससे पहले भी कई नसीर नंगला, खेड़ा समेत कई गांवों में मनरेगा में लापरवाही सामने आई थी।
मामला एक जैसा, कार्रवाई अलग-अलग
हाल में अमरोहा ब्लॉक के गांव नसीर नंगला में भी इसी तरह का मामला सामने आया था। यहां ग्राम प्रधान नरेंद्र सिंह द्वारा अपनी पत्नी कमलेश और बेटी आशी व हिमानी का जॉब कार्ड बनवाते हुए 55270 रुपये तथा रोजगार सेवक दीपक कुमार ने पिता तिरमल सिंह व माता निमलेश के नाम मजदूरी दर्शाकर 68720 रुपये निकाले थे। मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से की गई थी। इसकी जांच के बाद दोनों को दोषी पाया था। मामले में पंचायत सचिव सुमित कुमार का स्पष्टीकरण भी तलब किया गया था। जांच के बाद प्रधान व रोजगार सेवक से निकाली गई मजदूरी की रकम 1.24 लाख रुपये की वसूली कर ली गई थी। इसके बाद डीएम ने दोनों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही ग्राम प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज करने की संस्तुति भी की गई थी। बीडीओ नीरज गर्ग द्वारा नौगांवा सादात थाने में रोजगार सेवक व ग्राम प्रधान पर एफआईआर कराने के लिए तहरीर भी दे दी गई। लेकिन, पलौला के मामले ग्राम प्रधान पर केवल रिकवरी व अधिकार सीज करने की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। यहां प्रधान पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश नहीं किया गया। एक तरह के मामलों में दो अलग-अलग तरह की कार्रवाई होना भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

परिवार में किसने ली कितनी मजदूरी
शबीना - 71013
गजनबी - 66561
शेखू - 55312
नसरुद्दीन - 71704
आमिर सुहेल - 63851
नेहा - 55867
सरिया - 54645
सबा रानी - 17020
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जांच रिपोर्ट पूरी कर डीएम को सौंप दी गई है। डीएम की और से मिले निर्देशों के तहत कार्रवाई की जा रही है। - अमरेंद्र प्रताप सिंह, परियोजना निदेशक/ डीसी मनरेगा
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चलेगा विशेष अभियान : डीएम

डीएम निधि गुप्ता वत्स ने बताया कि जिले में मनरेगा में फर्जीवाड़ों पर अंकुश लगाने को विशेष अभियान चलाया जाएगा। सभी मस्टररोल की जांच कराई जाएगी तथा अपात्र लोगों के नाम जॉब कार्ड से हटाए जाएंगे।
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