हसनपुर में नोट बंदी से पैदा हुआ करेंसी संकट जानलेवा बन गया है। लोगों के पास मुसीबत से निपटने के लिए जो रुपये हैं, वे भी बैंकों से उन्हें नहीं मिल पा रहे हैं। अब एक मजदूर को अपनी जान गंवाकर इसकी कीमत चुकानी पड़ी है। एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित मजदूर को दूसरे शहर ले जाने के लिए पत्नी लंबी लाइन में लगी, मगर लंबी लाइन से उसका धैर्य टूट गया। वह बैंक से मायूस लौट आई। बेहतर इलाज के लिए मजदूर को को दूसरे शहर नहीं ले जाया जा सका। आखिरकार मजदूर ने बुधवार शाम तकरीबन पांच बजे घर पर ही दम तोड़ दिए।
कोतवाली क्षेत्र के गांव रामपुर भूड़ निवासी लक्की (35) पुत्र कलुवा मजदूरी करके परिवार का पेट भरता था। लक्की पर तीन बच्चे हैं। बड़ा बेटा पांच वर्ष का है। मजदूरी से बचाए कुछ रुपये उसने संकट के समय के लिए भारतीय स्टेट बैंक की हसनपुर शाखा में जमा किए थे, मगर एक साथ कई संकट आ गए।
एक तो लक्की को सप्ताहभर पहले बुखार आ गया, दूसरे नोट बंदी भी हो गई। पास जो रुपये थे वे बेकार हो गए और दूसरों से मिलने के हालात भी नहीं थे, नतीजतन उन्हें आसपास के झोलाछापों पर ही निर्भर रहना पड़ा। इधर रुपये के अभाव में झोलाछापसे दवा नहीं लिया जा सका। तबीयत अधिक बिगड़ी तो बेहतर उपचार के लिए मेरठ ले जाने का प्लान बनाया।
दूसरे शहर में इलाज कराने के लिए लक्की की पत्नी गौरी बैंक पहुंची। यहां लंबी लाइन में घंटों खड़ी रहने के बाद भी रुपये मिलने की सूरत नजर नहीं आई। उधर, घर पर बीमार पति की चिंता ने उसका धैर्य टूट गया। नतीजतन बिना रुपये के ही घर लौट आई। इधर, बुधवार शाम लक्की ने घर पर ही दम तोड़ दिया।