अमरोहा। किसान की मौत के बाद बीमा क्लेम देने से इन्कार करना बीमा कंपनी को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी को मृतक किसान के नाम पर छह लाख रुपये की क्लेम राशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कंपनी के रवैये को अनुचित मानते हुए आर्थिक और मानसिक पीड़ा के लिए 15 हजार रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये अतिरिक्त देने का आदेश भी दिया है। आयोग ने पूरी धनराशि एक माह के भीतर अदा करने के निर्देश दिए हैं।
मामला गजरौला क्षेत्र निवासी राजपाल सिंह से जुड़ा है। उन्होंने वर्ष 2015 में 28 हजार 318 रुपये प्रीमियम जमा कर बीमा पॉलिसी कराई थी। यह पॉलिसी 28 अक्तूबर 2015 से 28 अक्तूबर 2035 तक के लिए थी। पॉलिसी में उनके बेटे विजेंद्र को नॉमिनी बनाया गया था। बीमा कंपनी के एजेंट ने परिवार को बताया था कि पॉलिसी अवधि पूरी होने पर तीन लाख रुपये और बीमाधारक की मृत्यु होने पर नॉमिनी को छह लाख रुपये की धनराशि दी जाएगी। परिवार के अनुसार 28 अगस्त 2016 को राजपाल सिंह की अचानक तबीयत बिगड़ गई और घर पर ही उनकी मौत हो गई। इसके बाद उनके बेटे विजेंद्र ने सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ बीमा कंपनी में क्लेम के लिए आवेदन किया, लेकिन कंपनी ने भुगतान करने से इन्कार कर दिया। इससे परेशान होकर विजेंद्र ने जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि राजपाल सिंह शारीरिक रूप से विकलांग थे और उन्होंने पॉलिसी लेते समय अपनी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी छिपाई थी। कंपनी ने बताया कि इसी आधार पर एक मार्च 2017 को पॉलिसी निरस्त कर प्रीमियम राशि वापस कर दी गई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने बीमा कंपनी को दोषी माना। आयोग ने आदेश दिया कि कंपनी क्लेम की छह लाख रुपये की राशि वाद दायर करने की तिथि से नौ प्रतिशत ब्याज सहित अदा करे। साथ ही मानसिक व आर्थिक क्षति तथा वाद खर्च के रूप में कुल 25 हजार रुपये भी देने होंगे।