सुप्रीम कोर्ट की ओर से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का अल्पसंख्यक संस्था दर्जा बरकरार रखने के फैसले का स्वागत किया। उन्होने सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय को ऐतिहासिक बताया। इसके साथ ही अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने केंद्र सरकार से वक्फ बोर्ड एमेंडमेंट बिल को भी वापस लेने की मांग की है।
- सुप्रीम कोर्ट ने अल्पसंख्यकों के हित में फैसला दिया है। यह फैसला केंद्र सरकार के मुंह पर तमाचा है। सरकार को वक्फ बोर्ड एमेंडमेंट बिल भी वापस लेना चाहिए। सरकार को अल्पसंख्यक संस्थानों को छीनने से बाज आना चाहिए।
- कुंवर दानिश अली, पूर्व सांसद
- सुप्रीम कोर्ट का ये ऐतिहासिक निर्णय है। शिक्षा को पाने का समाज के प्रत्येक वर्ग का अधिकार है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगाई है। यह मानव अधिकार की जीत है। हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं।
- डॉ. सिराजुद्दीन हाशमी, चेयरमैन हाशमी एजुकेशनल ग्रुप
- अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अपनी पहचान रखती है। यहां से निकले छात्रों ने विदेशों में भी भारत का नाम रोशन किया है। इसका अल्पसंख्यक दर्जा बरकरार रखना ऐतिहासिक निर्णय निर्णय है। कोर्ट ने अल्पसंख्यकों का सम्मान बरकरार रखा है। - मसरूर अली सिद्दीकी
एडवोकेट, पूर्व अध्यक्ष, जनपद बार एसोसिएशन अमरोहा
- सुप्रीम कोर्ट ने एएमयू का अल्पसंख्यक का दर्जा बरकरार रखकर बहुत ही सराहनीय कार्य किया है। एएमयू इसके लिए पात्र भी है। देश के विकास में भी एएमयू का महत्वपूर्ण योगदान है। - डॉ. जमशेद कमाल, प्रधानाचार्य, आईएम इंटर कॉलेज अमरोहा
- यह एक ऐतिहासिक दिन है। सर्वोच्च न्यायालय के इस ऐतिहासिक फैसले को हमेशा याद रखा जाएगा। यह संवैधानिक उत्कृष्टता का एक अच्छा उदाहरण है। - मुजाहिद चौधरी एडवोकेट,
पूर्व छात्र एएमयू व अध्यक्ष सर सैयद एजुकेशनल मिशन