प्रदूषण से बढ़ने वाले संक्रमण की रोकथाम के लिए दस बेड से अधिक वाले अस्पतालों में एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट लगाना अनिवार्य कर दिया है। अस्पतालों में भारी मात्रा में लिक्विड बेस्ट से गंदा पानी निकलता है, जो बाद में नालों में चला जाता है। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। अस्पतालों में ईटीपी लगा है या नहीं इसकी जांच प्रदूषण नियंत्रण विभाग करेगा। इसके साथ ही एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट लगा न होने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई होगी। बोर्ड से आदेश मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल संचालकों को निर्देश भी दे दिए हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी आशुतोष चौहान ने बताया कि जिले में दस बेड से अधिक अस्पतालों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों के तहत अस्पतालों में लिक्विड बेस्ट के निष्पादन का इंतजाम करना अनिवार्य कर दिया गया है। अब सभी अस्पतालों को लिक्विड वेस्ट के निष्पादन के लिए ईटीपी प्लांट लगाने के निर्देश जारी किए हैं। जानकारी के अनुसार, अस्पतालों से मवाद, खून, केमिकल्स सर्जरी से निकलने वाली तरल गंदगी और संक्रमित पानी निकलता है, जो सीवेज लाइन के माध्यम से जाकर नालियों में बह जाता है। अस्पतालों से निकलने वाला यह पानी संक्रमित होता है, जिसके कारण चर्म रोग, कैंसर सहित अन्य बीमारियों के फैलाव का भी खतरा बना रहता है। वहीं, अस्पतालों से निकलने वाले संक्रमित लिक्विड बेस्ट भूजल को भी प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि अमरोहा जनपद में दस बेड या दस बेड से अधिक के 200 से अधिक निजी अस्पताल, नर्सिंग होम पंजीकृत है। इनमें अधिकांश के बायो मेडिकल वेस्ट के लिए अलग व्यवस्था कर रखी है। केवल पांच फीसदी अस्पतालों में इंटीपी लगा हुआ है। लेकिन अब पंजीकृत सभी निजी अस्पतालों में ईटीपी लगाया जाना अनिवार्य होगा, वरना कार्रवाई की जाएगी।