ई-रिक्शा, ऑटो में अधिकतम चार सवारियां बैठना मान्य हैं, लेकिन इनमें क्षमता से दोगुनी सवारियां बैठाई जा रही हैं। इससे जहां इन वाहनों के असंतुलित होने से हादसे का खतरा बना रहता है, वहीं पूरा किराया देकर भी सवारियां आरामदायक सफर नहीं कर पातीं। इनके व्यवस्थित संचालन की जिम्मेदारी निभाने वाली ट्रैफिक पुलिस मूकदर्शक बनी रहती है, तो परिवहन विभाग भी इस ओर ध्यान नहीं देता।
केंद्र सरकार की ओर से नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू किए जाने के बाद पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा दो पहिया व चार पहिया वाहनों की चेकिंग के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। वैसे भी सड़क सुरक्षा माह चल रहा है, लेकिन सड़कों पर दौड़ रहे ऑटो व ई-रिक्शा चालकों पर इसका कोई असर नहीं है। प्रमुख मार्गों और चौराहों पर हर जगह ई-रिक्शा व ऑटो का कब्जा नजर आता है। जिसके कारण दिन भर जगह-जगह जाम लगा रहता है। किशोर भी इनका संचालन कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों का इन पर ध्यान नहीं जाता। ये तो सवारी के चक्कर में कहीं भी रुक जाते हैं। नियम और कानून को ताक पर रखकर क्षमता से अधिक आठ से दस तक सवारियां बैठाकर उनकी भी जान जोखिम में डाल देते हैं। शुक्रवार को भी शहर की सड़कों पर दौड़ते ई-रिक्शा और ऑटो में ये ही स्थिति देखने को मिली। इतना ही नहीं ई-रिक्शा के पीछे लटक कर लोग सवारी करते देखे गए।
समाजसेवी अनिल कुमार जग्गा ने बताया कि कुछ साल पहले तक शहर में ऑटो और ई-रिक्शा नहीं थे, लेकिन कुछ ही समय में इनकी संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। नतीजा यह हुआ कि शहर के अंदर चौराहों, प्रमुख सड़कों पर भी इनकी बेतरतीब पार्किंग से जाम लगता है, जिससे लोगों को परेशानी होती है। यही नहीं किशोर भी ऑटो व ई-रिक्शा चलाते नजर आ जाते हैं जो सभी के लिए परेशानी का सबब बना है। कहा कि हालत दिन पर दिन बिगड़ते जा रहे हैं, इसके लिए संबंधित अफसर जिम्मेदार हैं।
लकड़ा चौराहा निवासी शिवम ने बताया कि शहर में जिस तेजी से ई-रिक्शा की संख्या बढ़ रही है, वह आने वाले समय में परेशानी का सबब बनेगी। बताया कि अभी भी सड़क पर जो ऑटो व ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं, उनके लिए न तो कोई नियम है और न कानून। ऑटो व ई रिक्शा वाले बीच सड़क पर वाहन रोक देते हैं और सवारी बैठाते हैं। इसी के चलते आए दिन हादसे होते रहते हैं। जिम्मेदारों को व्यवस्था सुधारने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए।