जिला अस्पताल में कर्मचारियों की कार्यप्रणाली कटघरे में खड़ी हो गई है। लाखों के घपले की आशंका जताई जा रही है, जिसकी वजह से दो दर्जन संविदा कर्मचारियों का मानदेय फंस गया है। तीन माह गुजर गए हैं, लेकिन कोई धनराशि नहीं मिली है।
जिला अकाउंट मैनेजर (डीएएम) द्वारा बार-बार धनराशि खर्च किए जाने का ब्योरा मांगा जा रहा है, किंतु अस्पताल प्रशासन उपलब्ध नहीं करा रहा है। प्रकरण शासन तक पहुंच गया है। अधिकारियों की मानें तो जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी।
केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम के तहत जिला अस्पताल को प्रत्येक वर्ष लाखों रुपये का बजट उपलब्ध कराया जाता है। करीब 74 लाख रुपये की धनराशि इस बार सरकार ने कार्यक्रम के तहत उपलब्ध कराई थी, जो संविदा कर्मचारियों के मानदेय के अलावा अन्य कार्यों पर खर्च की जानी थी।
खर्च धनराशि का पूरा ब्यौरा जिला लेखा मैनेजर को प्राप्त कराना था, लेकिन जनपद अस्पताल के अधिकारियों ने पूरी धनराशि खर्च कर दी। जनवरी से लेकर अभी तक संविदा कर्मियों को मानदेय नहीं मिला।
संविदा कर्मियों ने डीएएम को बताया कि अस्पताल कर्मियों द्वारा खर्च की गई धनराशि का लेखा-जोखा नहीं दिया जा रहा है। कई बार अधिकारियों से खर्च धनराशि की जानकारी मांग चुके हैं।
सूत्रों पर भरोसा करें तो करीब 23 लाख रुपये की घपलेबाजी का मसला है, जिसके चलते कर्मियों का मानदेय फंस गया है। डीएएम की मानें तो शासन को भी कई चिट्ठियां प्रकरण को लेकर लिखी जा चुकी हैं, जिसने जांच का आश्वासन दिया है और कार्रवाई की बात कही है।
जिस बाबू पर चार्ज था वह रिटायर हो चुके हैं। उनके द्वारा ही खर्च धनराशि के बाउचर व अन्य दस्तावेज तैयार किए जाते थे। उनको बार-बार बुलाया जा रहा है। कभी आते हैं, कभी टाल जाते हैं। उनसे बातचीत व रिकार्ड देखकर ही धनराशि का सही पता चलेगा। गड़बड़ी हुई है या नहीं, ये भी तभी सामने आएगा।डा. रामनिवास, सीएमएस जिला अस्पताल