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स्कॉर्पियो की टक्कर से बाइक सवार पिता-पुत्र की मौत

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हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव लुहारी खादर निवासी अशोक और उनके पांच वर्षीय बेटे ऋषभ की सड़क हादसे में मौत हो गई। अशोक बाइक से ऋषभ को दवा दिलाने के लिए गजरौला बाइक से आ रहे थे। मोहम्मदाबाद के सामने स्कॉर्पियो कार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी, जिससे बाइक सवार पिता-पुत्र की जान चली गई।
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हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव लुहारी खादर निवासी किसान राम कुंवर सिंह का मझला बेटा 30 वर्षीय अशोक कुमार मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करता था। उसके पांच वर्षीय बेटे ऋषभ की कई दिन से तबियत खराब थी। जिसको वह सोमवार सुबह गजरौला दवाई दिलाने के लिए डॉक्टर के पास आ रहे थे। अशोक के पास बाइक नहीं थी। वह पड़ोसी की बाइक मांगकर बेटे के लिए दवा लेने आ रहे थे। मोहम्मदाबाद जीरो प्वाइंट से कुछ ही कदम आगे दिल्ली की दिशा से आ रही स्कॉर्पियो कार ने बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर लगने से बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। स्कार्पियो में भी नुकसान हुआ। टक्कर लगने से अशोक और उसका पांच वर्षीय बेटा ऋषभ गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। घायल ऋषभ को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया, जबकि अशोक को सीएचसी ले जाया गया। जहां पर देखते ही अशोक को मृत घोषित कर दिया।
उधर, कुछ ही देर में ऋषभ की भी मौत हो गई। पिता-पुत्र की हादसे में मौत की खबर से कोहराम मच गया। गांव के लोग, रिश्तेदार, सगे संबंधी गजरौला सीएचसी पहुंचे। जानकारी होने पर परिवार की महिलाएं भी आ गईं। महिलाओं का विलाप देख हर किसी की आंख नम हो गईं। हादसे में मौत की खबर मिलने पर हसनपुर विधायक महेंद्र सिंह खड़गवंशी मौके पर पहुंचे। पिता-पुत्र की मौत पर विलाप कर रहे परिजनों को सांत्वना दी। बाद में पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे।
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थाना प्रभारी राजेश तिवारी का कहना है कि हादसे में पिता-पुत्र की मौत का मामला सामने आया है। स्कार्पियो व बाइक को कब्जे में ले लिया है। थाना प्रभारी राजेश तिवारी ने बताया कि हादसे में पिता-पुत्र की मौत का मामला सामने आया है। स्कार्पियो व बाइक को कब्जे में ले लिया है। शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे जा रहे हैं।
हादसे का शिकार हुए लुहारी खादर निवासी अशोक के तीन बच्चों में पांच वर्षीय बेटा ऋषभ सबसे छोटा था। दो बेटियां उससे बड़ी हैं। ग्रामीणों के मुताबिक घर में दो बेटियां पैदा होने पर दंपती बेटे के लिए खासे परेशान रहते थे। गंगा से लेकर सभी जगह मनौती मांगी। ऋषभ ने जन्म लिया तो परिवार में खुशियां छा गईं। परिजनों और रिश्तेदारों ने पतित पावनी गंगा की कृपा मानते हुए पांच वर्ष का बेटा हो जाने पर गंगा में स्नान कराने को कहा। अब वह पांच वर्ष का हो गया था। अगले माह में आ रहे दशहरा पर उसे गंगा में स्नान कराने की तैयारी थी। मगर कुदरत को यह स्वीकार न था।
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