मंडी धनौरा। अखबारों की सुर्खियां बनने के बावजूद रूस में लापता अक्षय के परिजनों को अब तक किसी तरह की मदद नहीं मिल सकी है।
परिजनों का आरोप है कि गुहार लगाने के बाद भी प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने सुध नहीं ली। कहा कि प्रशासन की बेरुखी से अब बेटे के लौटने की उनकी उम्मीदें डूबने लगी हैं।
गांव छीतरा निवासी अक्षय करीब दो साल पहले स्टडी वीजा पर रूस गया था। परिजनों के मुताबिक, वहां अलीशा नाम की एक एजेंट ने उसे अच्छे वेतन का झांसा देकर रूसी सेना में भर्ती करा दिया था। परिजनों का कहना है कि बीती एक जुलाई को अक्षय युद्ध के मोर्चे पर घायल हो गया था। इसके बाद भी वह लगातार परिवार के संपर्क में रहा। आखिरी बार 24 अगस्त को अक्षय से परिजनों की बातचीत हुई थी लेकिन इसके बाद उसका फोन बंद हो गया।
लगातार प्रयास के बाद जब अक्षय से संपर्क नहीं हुआ तो रूसी सेना में भर्ती कराने वाली एजेंट से बात करने की कोशिश की लेकिन वह भी फोन का कोई जवाब नहीं दे रही है। रूस में लापता बेटे का पता लगाने के लिए परिजन दिल्ली तक अधिकारियों के चक्कर लगा चुके हैं। उनका कहना है कि कई जगह गुहार लगाने के बावजूद बेटे की जानकारी नहीं मिल सकी है।
आरोप लगाया कि अखबारों में लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद भी किसी प्रशासनिक अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने परिवार से संपर्क नहीं किया। अक्षय के पिता रणधीर सिंह का कहना है कि बेटे के लापता होने के बाद से परिवार मानसिक परेशानी से गुजर रहा है।
हर दिन इस उम्मीद में गुजरता है कि शायद बेटे की कोई खबर मिल जाए लेकिन शाम होते ही चिंता और बढ़ जाती है। कहा कि अब तो बेटे के लौटने की उम्मीदें धूमिल होने लगी हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाते हुए अक्षय का पता लगाकर उसे सकुशल भारत वापस लाने के लिए मदद की मांग की है।