यह सरकारी मिशनरी की विफलता ही है कि चौधरी चरण सिंह हवाई अड्डे की सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने का जिम्मा निजी हाथों में सौंपा जाएगा।
खराब सेवाओं की लगातार मिल रही शिकायतों का संज्ञान लेते हुए नागर विमानन मंत्रालय ने यह फैसला लिया है।
एयरपोर्ट को विकसित करने के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) और निजी कंपनी के बीच ज्वाइंट वेंचर पार्टनरशिप होगी।
पार्टनरशिप से बाहर होगा एटीसी
निजी कंपनी एयरपोर्ट के संसाधनों और भवन का इस्तेमाल कर यात्री सेवा को बेहतर करेगी। कंपनी के हाथ में एयरपोर्ट की मरम्मत और उसे संचालित करने का अधिकार होगा।
एयर ट्रैफिक कंट्रोल को निजीकरण से बाहर रखा जाएगा। एयरपोर्ट टर्मिनल में तैनात एएआई के ग्राउंड स्टॉफ की तैनाती उन एयरपोर्ट पर होगी जहां कर्मचारियों की पहले से कमी है।
एयरपोर्ट पर मौजूद संसाधनों का विकास कर यहां आय के साधन बढ़ाने के लिए निजी कंपनी का सहारा लिया जाएगा।
तैनात किए जाएंगे मैनेजमेंट एक्सपर्ट
निजी कंपनी ही एयरपोर्ट की मरम्मत और सेवाओं को बेहतर करने के लिए प्रबंधन में दक्ष विशेषज्ञों की तैनाती करेगा। कंपनी के एक परामर्शदाता को ही यहां एयरपोर्ट के मॉडल को बेहतर करने का जिम्मा दिया जाएगा।
लखनऊ के नए टर्मिनल में व्यवसायिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी। सामान ले जाने वाली ट्रालियों से लेकर उनके बोर्डिंग पास काउंटर तक की सभी सेवाओं को ऑटोमेटिक करने की योजना है।
हालांकि इस बारे में एयरपोर्ट के निदेशक एससी होता का कहना है कि उनको निजी कंपनी को लेकर बन रही किसी भी योजना की कोई जानकारी नहीं है।
ये होंगी खास बातें
•एयरपोर्ट को विकसित करने के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) और निजी कंपनी के बीच ज्वाइंट वेंचर पार्टनरशिप होगी।
•एयर ट्रैफिक कंट्रोल को निजीकरण से बाहर रखा जाएगा।
•कंपनी के एक परामर्शदाता को ही एयरपोर्ट के मॉडल को बेहतर करने का जिम्मा दिया जाएगा।
•सामान ले जाने वाली ट्रालियों से लेकर उनके बोर्डिंग पास काउंटर तक की सभी सेवाओं को ऑटोमेटिक करने की योजना है।