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सरकारी कार्यालयों के जर्जर भवन दे रहे हादसों को दावत

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18 : अमेठी : तहसील परिसर स्थित जर्जर भवन। -संवाद - फोटो : AMETHI
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अमेठी। अरसा पूर्व बने जर्जर सरकारी कार्यालयों के भवन किसी बड़ी दुर्घटना को दावत दे रहे हैं। आए दिन उक्त भवनों का मलबा गिरने से लोग चोटिल होते रहते हैं। बावजूद इसके प्रशासनिक अफसर सब कुछ जानते हुए भी अनजान बने हुए हैं।
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ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में कई दशक पूर्व बने सरकारी कार्यालयों भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। इनमें से कुछ सरकारी भवन तो निष्प्रयोज्य घोषित हो चुके हैं। बावजूद इसके जर्जर भवनों को ध्वस्त नहीं किये जाने की वजह से कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर कार्य करने को मजबूर हैं।
इन दिनों बारिश का मौसम चल रहा है। जिसके चलते आए दिन जर्जर हो चुके भवन का प्लास्टर व छत आदि आंशिक रूप से गिरता रहता है। शहर स्थित कृषि रक्षा इकाई केंद्र, पशु चिकित्सालय व तहसील परिसर में स्थित कई भवन जर्जर हो चुके हैं।
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आज भी कर्मचारी इसके नीचे बैठकर काम कर रहे हैं। पिछले कई माह पूर्व तहसील परिसर में प्लास्टर गिरने से दो राजस्व कर्मी घायल हो गए थे। तहसील परिसर में ही संचालित सीओ कार्यालय के सामने छज्जा गिर गया था। संयोग ही था कि उस समय वहां कोई कर्मी व फरियादी मौजूद नहीं था।
कृषि रक्षा केंद्र के जर्जर भवन का प्लास्टर गिरता रहता है। पशु चिकित्सालय के जर्जर भवन में भी कर्मचारी काम करने को मजबूर हैं। तहसील परिसर स्थित जर्जर भवन निष्प्रयोज्य घोषित हो चुका हैं। बावजूद इसके अब तक उसे ध्वस्त नहीं कराया गया।
तहसील में भवन के अभाव में कर्मचारी जर्जर हो चुके भवनों में काम कर रहे हैं। यही नहीं कोतवाली परिसर स्थित आवासीय भवन भी जर्जर हो चुके हैं। पुलिस कर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। यही हालात तकरीबन शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों का है।
प्रबुद्ध लोगों ने जिला प्रशासन से जर्जर एवं निष्प्रयोज्य घोषित हो चुके भवनों को चिह्नित कर ध्वस्त किए जाने की मांग की है। संबंधित अधिकारियों की ओर से जर्जर हो चुके भवनों के संबंध में उच्चाधिकारियों से कई बार पत्राचार किया जा चुका है। बावजूद इसके हालात जस के तस बने हैं।
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