गौरीगंज (अमेठी)। तेजी से फैल रहे वायरल फीवर को चिकित्सक स्क्रब टाइफस फीवर बता रहे हैं। यह बुखार बारिश के मौसम में जंगली घासों में पाए जाने वाले खतरनाक जीवाणु ओरियाएंटिया त्सुत्सुगामुशी बैक्टीरिया के काटने से फैलता है। चिकित्सक ने ब्लड टेस्ट के जरिए सीबीसी काउंट व लिवर फंक्शनिंग टेस्ट के साथ एलाइजा व इम्युनोफ्लोरेसेंस जांच में इसके पाए जाने का दावा किया है।
जिला अस्पताल में तैनात चिकित्सक डॉ. नीरज वर्मा ने बताया कि बुखार पीड़ितों की पैथालॉजी जांच कराने पर अधिकतर मरीजों में स्क्रब टाइफस एंटी बॉडीज का पता चला। चिकित्सक ने बताया कि स्क्रब टाइफस बरसात के मौसम में जंगल, खेत व घनी घासों के बीच पाए जाने वाले खतरनाक जीवाणु ओरियाएंटिया त्सुत्सुगामुशी बैक्टीरिया के काटने से फैलता है।
इस बुखार में मरीज को ठंड के साथ कंपकंपी, सिर दर्द, मांस पेशियों में दर्द, त्वचा पर गहरे रंग के पपड़ीदार निशान, चकत्ते व लसीका ग्रंथी में सूजन आ जाती है। इसमें मरीज की प्लेटलेट्स तेजी से घटती हैं।
कहा कि लगातार दो हफ्ते बुखार रहने पर मरीज को निमोनिया तो कुछ की लीवर व किडनी सामान्य तरीके से काम करना बंद कर देती हैं जिससे मरीज बेहोशी की हालत में चला जाता है। उन्होंने ऐसे लक्षण वाले मरीजों को लापरवाही नहीं बरतने की सलाह दी है। कहा कि बुखार आते ही किसी भी सरकारी अस्पताल पहुंचकर इलाज कराने के साथ ही सिर्फ लिक्विड डाइट लें।