गौरीगंज (अमेठी)। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत संचालित कार्यों की जांच के लिए डीएम ने अफसरों की टीम गठित की है। अफसरों को कार्यों का स्थलीय सत्यापन करते हुए वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति धनराशि तथा माप पुस्तिका के अनुसार किए गए कार्यों के अनुसार रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
निर्देश के बावजूद नौ जिला स्तरीय अफसरों ने जांच रिपोर्ट नहीं दी तो डीएम ने सभी के अक्तूबर माह के वेतन आहरण पर रोक लगा दी। डीएम ने सभी को 15 दिन में जांच पूरी कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। बावजूद इसके रिपोर्ट नहीं मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।
ग्राम पंचायतों में जॉब कार्डधारकों को रोजगार देने के साथ विकास कार्य संपादित करने के लिए महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से कई विकास कार्य कराए जाते हैं। कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित न हो तथा सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सके इसके लिए डीएम अरुण कुमार ने समीक्षा के दौरान कार्यों की गुणवत्ता व स्थलीय सत्यापन की जांच कराने हेतु जांच कमेटी का गठन किया था।
जांच कमेटी को स्थलीय भ्रमण कर कार्यों की प्राक्कलन लागत के अनुसार वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति की धनराशि तथा माप पुस्तिका के अनुसार किए गए कार्य की जांच करते हुए गुणवत्ता का परीक्षण व रोजगार सृजन की हकीकत शामिल करते हुए रिपोर्ट देने को कहा गया था। निर्देशों के बावजूद शुक्रवार तक ज्यादातर अफसरों ने रिपोर्ट नहीं दी।
कुछ ने दिया भी तो उनकी जांच आख्या अधूरी एवं अपर्याप्त मिली। जांच टीम की लापरवाही से नाराज डीएम ने नाराजगी जाहिर करते डीआईओएस जेके वर्मा, डीडी कृषि सत्येंद्र सिंह चौहान, बीएसए डॉ. अरविंद कुमार पाठक, सहायक अभियंता जिला ग्रामीण विकास अभिकरण अशोक कुमार श्रीवास्तव, सहायक अभियंता लोनिवि कुमार गौरव, आशुतोष सिंह, एसएन यादव व बीआर मिश्र तथा डीपीआरओ श्रीकांत यादव का अक्तूबर माह का वेतन बाधित करने का आदेश पारित कर दिया।
डीएम ने सभी को मनरेगा कार्यों की 15 दिन में स्थलीय जांच करते हुए गुणात्मक संयुक्त जांच आख्या देने का निर्देश दिया है। डीएम ने जांच आख्या नहीं मिलने की दशा में विभागीय कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजने के साथ अन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है।