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ग्रामीणों के लिए मुसीबत बनी गुलालपुर ड्रेन

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20 : गौरीगंज : खाखरदेई में डे्रन से हुआ जलभराव। (फाइल फोटो)। -संवाद - फोटो : AMETHI
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गौरीगंज (अमेठी)। जिले के कई ब्लॉकों को जलभराव की समस्या से निजात दिलाने के लिए 33 साल पूर्व निर्मित गुलालपुर ड्रेन एक दर्जन से अधिक गांवों के लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। इस ड्रेन के बनने के बाद से ही इन गांवों की करीब एक हजार हेक्टेयर से अधिक भू-भाग पर खेती नहीं हो पा रही। इससे बड़ी संख्या में किसानों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है। आलम यह है कि ग्रामीणों के लगातार धरना-प्रदर्शन व मांग के बावजूद शासन-प्रशासन को यह समस्या नजर नहीं आ रही है।
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जामो व शाहगढ़ ब्लॉक के एक दर्जन से अधिक गांव पिछले कई दशक से जलभराव की समस्या से जूझ रहे थे। ग्रामीणों को जलभराव की समस्या से निजात मिल सके इसके लिए कांग्रेस सरकार ने वर्ष 1988-89 में 52 किलोमीटर लंबे ड्रेन का निर्माण कराया।
जामो से निकली यह ड्रेन खाखरदेई, सेवई हेमगढ़, घोसियान, लोनियन का पुरवा, राजापुर, रानीपुर, महराजगंज, बिहारीगंज, टोडरपुर, बस्तीदेई, गुलालपुर, बेनीपुर बल्देव, पूरे इबादुल्ला, पहाड़पुर, छरियावां, चिलबिली व किटियावां होते हुए भेटुआ व संग्रामपुर ब्लॉक के कई गांवों से होते हुए प्रतापगढ़ से होकर बहने वाली सई नई में गिरती है।
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ग्रामीणों का कहना है कि इस ड्रेन की चौड़ाई (मात्र पांच मीटर) कम होने की वजह से उनकी समस्या घटने के बजाए बढ़ गई। इस ड्रेन की वजह से इसके आस पास स्थित एक हजार हेक्टयेर भू-भाग पर खेती नहीं हो पा रही। बरसात के महीने में इस भू-भाग पर होने वाला जलभराव गेहूं बोने का समय समाप्त होने के बाद तक बना रहता है। जलभराव के चलते इस भूमि पर न तो रबी से जुड़ी खेती हो पाती है न ही खरीफ सीजन से जुड़ी। ड्रेन के आस-पास खेती न हो पाने से बड़ी संख्या में किसानों के समक्ष भोजन का संकट बना रहता है।
ड्रेन में गिरते हैं कई नाले व माइनर
समस्या इसलिए भी बड़ी हो जाती है क्योंकि हेड से लेकर टेल तक इस ड्रेन में 18 नाले व 21 माइनरें गिरती हैं। जिस समय बरसात शुरू होती है उस समय इन नालों व माइनरों का पानी जाते ही यह ड्रेन उफनाने लगती है। चौड़ाई कम होने से देखते ही देखते ड्रेन में पानी भर जाता है और आसपास के इलाके को जलमग्न कर देता है। ग्रामीणों के अनुसार इस ड्रेन की सफाई सिर्फ कागजों में होती है। उनके अनुसार यदि ड्रेन को गहरा व चौड़ा कर दिया जाए तो लोगों की समस्या समाप्त हो सकती है।
चुनाव बहिष्कार का ऐलान, प्रदर्शन
समस्या से परेशान ग्रामीणों ने गुरुवार सुबह सेवई हेमगढ़ के बाहर मतदान बहिष्कार का बैनर लगा दिया। बैनर लगाने के बाद लोगों ने प्रदर्शन किया। लोगों का कहना था कि जब शासन-प्रशासन का उनकी समस्या से कोई सरोकार नहीं है तो वे वोट डालने ही क्यों जाएं। ग्रामीणों ने कहा कि जब तक प्रशासन उन लोगों को लिखित में ड्रेन चौड़ीकरण का आदेश मुहैया नहीं कराएगा वे अपना फैसला वापस नहीं लेंगे।
समस्या से प्रभावित ग्रामीणों का दर्द
खाखरदेई के रहने वाले महादेव मिश्र, सूर्यनाथ मिश्र, विनोद मिश्र व शोभनाथ यादव, सेवई हेमगढ़ के गुड्डू सिंह, राम अवतार यादव, जगरूप गुप्ता, पूरे इबादुल्ला गांव के राम बहादुर यादव, बेनीपुर बल्देव के मंसूर अहमद और गुलालपुर के कमलाकर मिश्र कहते हैं कि इस समस्या ने हम लोगों को बर्बाद करके रख दिया है। हमारे घर अन्न का एक दाना नहीं आ पाता। इतनी बड़ी समस्या न तो शासन को दिखती है न ही प्रशासन को।
शुरू करेंगे आमरण अनशन
खाखरदेई गांव के नैमिष प्रसाद पांडेय इस समस्या को लेकर पिछले कई सालों से आंदोलन कर रहे हैं। शासन-प्रशासन से मिलकर समस्या का निस्तारण कराने की मांग कर रहे हैं। नैमिष ने कहा कि वे लोग केसीसी पर लोन लेकर हर सीजन में धान लगाने का रिस्क लेते हैं। हालांकि बरसात बाद उनके द्वारा किया गया निवेश व मेहनत दोनों पानी में डूब जाती है। बाद में उन्हें बैंक से लिए गए ऋण को जमा करने के लिए परेशान होना पड़ता है। जिन घरों में कोई बाहर कमाने वाला नहीं है उन घरों में अक्सर भोजन का संकट बना रहता है। नैमिष ने कहा कि इस समस्या से परेशान लोग कलेक्ट्रेट में आमरण अनशन शुरू करेंगे।
स्मृति का आश्वासन भी बेअसर
ग्रामीणों की मांग पर करीब तीन माह पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी स्वयं प्रभावित लोगों से मिलने गांव गई थीं। ग्रामीणों की समस्या सुनने के बाद स्मृति की ओर से लगाई गई फटकार के अगले ही दिन राजस्व विभाग के अफसर व लेखपाल गांवों में पहुंचे और लोगों से उनका केसीसी कार्ड नंबर व डूबे क्षेत्र में आने वाली जमीन आदि की जानकारी ली। कहा गया कि जल्द ही सभी को क्षतिपूर्ति दी जाएगी। लेकिन यह क्षतिपूर्ति आज तक नहीं मिल सकी।
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