गौरीगंज (अमेठी)। कोविड संक्रमण की रफ्तार कम होने के बाद स्कूलों में फैल रहे वायरल फीवर का खौफ देखने को मिल रहा है। स्कूलों में बचाव संसाधनों की कमी व तीसरी लहर की आशंका के बीच मात्र 55 प्रतिशत बच्चे ही स्कूल पहुंचे। अभिभावक अपने पाल्यों के संक्रमित होने के खतरे को देखते हुए भयभीत हैं।
मार्च 2020 से कोविड संक्रमण के कारण प्रभावित शिक्षा व्यवस्था में सुधार की कोशिश सफल नहीं हो रही है। 16 अगस्त से 35 राजकीय, 25 सहायता प्राप्त व 199 वित्त विहीन इंटर कॉलेज, 23 अगस्त से जूनियर तो एक सितंबर से सभी प्राथमिक स्तर के स्कूलों में बच्चों को बुलाया जा रहा है।
स्कूल खुलने के शुरुआती दिनों में तो बच्चों का उत्साह स्कूल आने के प्रति काफी था लेकिन इसी बीच वायरल फीवर फैलने से लोग भयभीत होने लगे। कक्षा एक से आठ तक पंजीकृत 1,86,633 बच्चों में से मंगलवार को 1,03,652 बच्चे ही स्कूल पहुंचे तो माध्यमिक स्कूलों में संख्या 50 प्रतिशत से अधिक नहीं रहीं।
वायरल फीवर बढ़ने से स्कूलों में दिन-प्रतिदिन संख्या घटती जा रही है तो ज्यादातर स्कूलों में थर्मल स्क्रीनिंग व सैनिटाइजेशन की व्यवस्था न होने से बच्चे स्कूल नहीं आना चाह रहे हैं। सर्वाधिक परेशानी कोविड की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए है। अभिभावक भी अपने बच्चों को स्कूल भेजना नहीं चाह रहे हैं।
सिंहपुर ब्लॉक के यूपीएस पेंडारा में कक्षा सात में पढ़ने वाले शशिकांत व सुनयना तथा कक्षा आठ में पढ़ने वाले देवेंद्र व रागिनी ने कहा कि उन्हें ऑनलाइन से ज्यादा ऑफलाइन पढ़ाई पसंद है। बुधवार को स्कूल आने वाले कई अन्य बच्चों का कहना भी यही रहा। बच्चों का कहना था कि वे घर में रहकर बोर हो जाते हैं।
बीएसए डॉ. अरविंद कुमार पाठक ने बताया कि स्कूलों में कोविड गाइडलाइन के बीच पढ़ाई कराई जा रही है। स्कूलों में सोशल डिस्टेंसिंग व बचाव नियमों का पालन न होने की दशा में प्रधानाध्यापक के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। फिलहाल सभी स्कूलों में निर्विघ्न पढ़ाई चल रही है।