अमेठी। मतगणना के बाद अब जगह-जगह जीत हार को लेकर चर्चा का बाजार गर्म हो गया है। स्थानीय विधानसभा क्षेत्र में जहां चुनाव में हुई शिकस्त एवं कम मत मिलने को लेकर प्रत्याशी मंथन में जुटे हैं। विधानसभा क्षेत्र में भाजपा, कांग्रेस और बसपा को मिला दर्द अपनों ने दिया है।
जिले की सबसे चर्चित और हॉट सीट अमेठी विधानसभा है। विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद जब तक मतगणना नहीं हुई थी लोग कयास नहीं लगा पा रहे थे कि किसके पाले में यह सीट रहेगी और किसके सिर पर सेहरा बंधेगा। चुनाव में जहां त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा, सपा और कांग्रेस की कड़ी टक्कर लग रही थी वहीं बसपा भी अपने मूल्य वोटों के साथ पूरी दमदारी से चुनाव लड़ रही थी।
बृहस्पतिवार को हुई मतगणना के बाद सपा प्रत्याशी महराजी प्रजापति ने 18 हजार से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की। हार के बाद शुक्रवार को स्थानीय विधानसभा क्षेत्र में भाजपा, कांग्रेस और बसपा के प्रत्याशी व उनके समर्थक शिकस्त के कारणों का मंथन में जुटे रहे। विधानसभा क्षेत्र में जगह-जगह जीतने और हारने वाले प्रत्याशियों के समर्थक जीत हार को लेकर चर्चा करते दिखाई दिए।
लोगों के अनुसार स्थानीय विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की हार और कांग्रेस को कमजोर करने के पीछे अपनों का भितरघात था। कैडर वोट पर ज्यादा भरोसा करने वाली बसपा का साथ भी अपनों ने नहीं दिया। विधानसभा चुनाव में पिछले चुनाव में मिले मतों के साथ एक इस बार एक तिहाई ही मत बसपा प्रत्याशी को मिला। जीत हार की चर्चाओं में लोग हारने वाली तीनों प्रमुख पार्टियों के पदाधिकारियों एवं वरिष्ठ कार्यकर्ताओं पर सवाल भी उठा रहे हैं।
भाजपा जहां विधानसभा में करीब 70 हजार मतों का आंकड़ा पार करने के बाद भी चुनाव नहीं जीत सकी वहीं कांग्रेस और बसपा अपने-अपने संगठन और कार्यकर्ताओं के भी वोटों को सहेजने में नाकाम दिखी। अभी तक के विधानसभा चुनाव के इतिहास में बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस दोनों का यह सबसे निचले पायदान का प्रदर्शन है।
इसके पूर्व इन दोनों दलों का मत 30 हजार के इर्द-गिर्द देखा जाता रहा। वर्ष 2017 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को करीब 20 हजार मत हासिल हुए तो बसपा प्रत्याशी ने 30 हजार का आंकड़ा पार किया था। भाजपा प्रत्याशी ने करीब 64 हजार मत पाकर जीत दर्ज की तो सपा के रनर रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति को करीब 59 हजार मत हासिल हुए थे।
इस बार सपा के पक्ष में मतदाताओं का ध्रुवीकरण चौंकाने वाला साबित हुआ। एक बात स्पष्ट दिखाई पड़ी कि जिस प्रकार सूबे में मतदाताओं का ध्रुवीकरण दो दलों के बीच में हुआ, उसी प्रकार विधानसभा क्षेत्र अमेठी में भी हारने और जीतने वाले प्रत्याशियों के पक्ष में मतदाताओं का ध्रुवीकरण दिखाई पड़ा।