कहा गया कि जनसंख्या बढ़ने के कारण ही विभिन्न प्रकार की दैवीय आपदाएं बढ़ रही हैं और कई अन्य समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। तय किया गया कि एक सप्ताह तक लोगों को जागरूक करने के साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों में कैंप लगाकर जनसंख्या नियंत्रण के उपाय अपनाने पर जोर दिया जाएगा।
जिला चिकित्सालय में आयोजित गोष्ठी में सीएमओ मेजर डॉ. बीपी सिंह ने जनसंख्या स्थिरता पर जोर देते हुए कहा कि सभी अस्पतालों में इसे लेकर गंभीरता से प्रयास किए जाएं।
बेटा व बेटी को एक समान समझा जाए। सीएमएस डॉ. आरके पटेल ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभानी होगी। इस मौके पर विभाग के कई अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
जिला मुख्यालय पर अकबरपुर पीएचसी के प्रभारी डॉ. सुभाषचंद्र ने रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे लोगों को परिवार नियोजन के विभिन्न उपाय अपनाने के लिए प्रेरित करें। परिवार में दोनों बच्चों के बीच तीन वर्ष का अंतर रखने के लिए सभी से आह्वान किया गया।
रैली ने नगर के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण किया। इसमें स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी एनसी राम, चंपा पाठक, तारा श्रीवास्तव, सोना देवी, इंद्रावती समेत कई अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
बसखारी प्रतिनिधि के अनुसार अपर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जीआर चंद्रा व ग्राम प्रधान संघ जिलाध्यक्ष रुद्र प्रसाद उपाध्याय ने संयुक्त रूप से जनसंख्या स्थिरता को लेकर निकली रैली को हरी झंडी दिखाई। बाजार के विभिन्न मार्गों का भ्रमण करने के दौरान लोगों को जनसंख्या नियंत्रण के लिए और ज्यादा सजग रहने की सीख दी गई।
वापस चिकित्सालय आकर रैली समाप्त हुई। जहां डॉ. जीआर चंद्रा ने बढ़ती जनसंख्या के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला। कहा कि आवासीय सुविधा के लिए तेजी से पेड़ों व जंगलों की कटान हो रही है, जिससे पर्यावरण असंतुलित हो रहा है। इससे ही तमाम दैवीय आपदाएं आ रही हैं।
सीएचसी प्रभारी डॉ. महेंद्र ने आह्वान किया कि विवाह के दो वर्ष तक परिवार की भावी रणनीति बनाने के बाद ही संतान को जन्म देकर उसका बेहतर पालन पोषण करना चाहिए। कम से कम तीन वर्ष बाद ही दूसरी संतान की कल्पना करनी चाहिए।
इसके बाद परिवार नियोजन के विभिन्न साधनों का अनिवार्य रूप से प्रयोग करना चाहिए। बताया कि अस्पताल में 24 जुलाई तक आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। इस मौके पर डॉ. मारकंडेय प्रसाद, डॉ. पी देव, डॉ. अंजुम आरा समेत कई अन्य लोग मौजूद रहे। टांडा, आलापुर, जलालपुर व भीटी के कई अन्य अस्पतालों में भी इस प्रकार के आयोजन हुए।