अंबेडकरनगर। शिक्षक दिवस पर अध्यापकों को सम्मानित करने के नाम पर जिले में बरती गई हद दर्जे की मनमानी का खुलासा हुआ है। आठ सदस्यीय चयन समिति के सात सदस्यों ने खुद का नाम सम्मानित होने वाली सूची में जोड़ दिया। इसके बाद वे सम्मानित भी हो गए। माध्यमिक शिक्षकों के सम्मान में करतूत यहीं तक सीमित नहीं रही। समिति के कई सदस्यों ने अपने-अपने विद्यालयों के शिक्षकों पर विशेष कृपा भी दिखाई। उधर, बेसिक शिक्षा में भी 75 शिक्षकों के सम्मान में ऐसे शिक्षक भारी पड़ गए, जिनकी विभागीय बाबुओं व अफसरों से निकटता ज्यादा रही। नए शिक्षकों को मौका देने की बजाय कई रटे रटाये नामों को ही वरीयता मिल गई। इसे लेकर तमाम विद्यालयों के शिक्षकों में नाराजगी व्याप्त है। कई शिक्षकों व संगठनों ने डीएम व शासनस्तर पर प्रकरण की शिकायत कर पूरे मामले की जांच करवाने का निर्णय लिया है।
शिक्षक दिवस के मौके पर शासन के निर्देश के क्रम में माध्यमिक व बेसिक शिक्षा विभाग के 75-75 शिक्षकों को जिला मुख्यालय पर बीते दिन सम्मानित किया गया। शासन ने शिक्षकों को सम्मानित करने के लिए बाकायदा दिशा निर्देश जारी किया। उसका अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया। ऐसा इसलिए जिससे योग्य शिक्षकों को सम्मानित किया जा सके। इससे इतर जिले में माध्यमिक व बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के चयन को लेकर जिस तरह का रवैया अपनाया, उससे ज्यादातर शिक्षकों में नाराजगी हो गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादातर शिक्षकों का आरोप है कि डेढ़ सौ शिक्षकों के सम्मान में ऐसे तमाम नामों को वरीयता दी गई, जो विभागीय अफसरों व बाबुओं के नजदीकी हैं।
शिक्षकों की यह नाराजगी अनायास भी नहीं है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने योग्य 75 शिक्षकों के चयन के लिए आठ सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। सामान्य परिपाटी व नैतिक मूल्यों के सापेक्ष चयन कमेटी के आठ में से सात सदस्यों ने अपना ही नाम 75 उत्कृष्ट शिक्षकों की सूची में दर्ज कर लिया। इन सभी को शिक्षक दिवस पर सम्मानित भी कर दिया गया। इसे लेकर शिक्षकों में नाराजगी व्याप्त है। शिक्षकों का कहना है कि चयन समिति के सदस्यों को अपना नाम सूची में शामिल करने की बजाय ऐसे शिक्षकों को प्राथमिकता देनी चाहिए थी, जिन्हें अब तक सम्मानित होने का मौका नहीं मिला और वे पूरी तत्परता से काम कर रहे हैं। शिक्षकों का यह भी आरोप है कि कई ऐसे शिक्षकों को सम्मानित किया गया, जो दागी रहे हैं। जिनके विद्यालय की प्रगति पिछले दिनों अच्छी नहीं रही। उनको भी सूची में शामिल कर लिया गया। शिक्षकों का कहना था कि दागियों की अपेक्षा अन्य शिक्षकों को वरीयता मिलनी थी।
उधर, बेसिक शिक्षा विभाग के 75 शिक्षकों के सम्मान में भी कई तरह के गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। दरअसल कई ऐसेे शिक्षकों को सम्मानित कर दिया गया, जो अक्सर विभिन्न मंचों व कार्यक्रमों में दिखाई पड़ते हैं। आरोप है कि ऐसे कई शिक्षक सिर्फ जुगाड़ के भरोसे अक्सर अपना नाम ऐसी सूची में शामिल कराकर कामयाबी हासिल कर लेते हैं। इस बार भी यही हुआ। रटे रटाये कई नाम सूची में शामिल कर दिए गए। ऐसे शिक्षकों को भी सम्मानित कर दिया गया, जिन्हें बीते दिनों सम्मानित किया गया था। सम्मान से वंचित रहे कई शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि रटे रटाये नामों की बजाय कुछ नए शिक्षकों को सम्मानित किया जाता तो अन्य शिक्षकों को भी बेहतर करने की प्रेरणा मिलती। इससे विभाग के साथ-साथ छात्र-छात्राओं का भी फायदा होता।
डीएम व शासन से शिकायत की तैयारी
शिक्षकों के सम्मान में बरती गई मनमानी की शिकायत उच्चस्तर पर करने की तैयारी है। माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पूरे मामले की शिकायत डीएम सैमुअल पॉल एन व लखनऊ जाकर मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव को ज्ञापन दिया जाएगा। जिलाध्यक्ष ने कहा कि विभागीय अधिकारियों व कार्यालय का चक्कर लगाने वाले तमाम शिक्षकों को पुरस्कृत कर दिया गया। शिक्षकों के चयन में मानक को दरकिनार किया गया। चयन समिति के सदस्यों ने खुद का नाम अनुचित ढंग से शामिल कर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षकों के सम्मान के लिए वसूली भी की गई। जिलाध्यक्ष ने कहा कि माध्यमिक व बेसिक शिक्षा दोनों में जिस तरह कुछ रटे रटाये नामों को ही प्राथमिकता दी गई, वह शासन के निर्देशों के सर्वथा प्रतिकूल है। सम्मान करने में मानक का पूरी तरह उल्लंघन हुआ है। इसकी उच्च स्तरीय जांच कराकर कार्रवाई की जाए। यह देखा जाए कि पिछले कई वर्षों में किन-किन शिक्षकों को माध्यमिक व बेसिक में बार-बार प्रत्येक मंच पर किसी न किसी रूप में सम्मानित होने का मौका जानबूझकर दिया जा रहा। ऐसा होता रहा कि नए शिक्षकों को मौका कब मिलेगा। उन्हें आखिर प्रेरणा कैसे मिलेगी।
लग रहे अवैध वसूली के आरोप
बेसिक व माध्यमिक शिक्षकों के सम्मान में अवैध वसूली के भी आरोप लग रहे हैं। शिक्षकों ने इसकी भी शिकायत करने की तैयारी की है। माध्यमिक शिक्षक संघ ने मंगलवार को डीएम से मिलकर इस बात की शिकायत करने का निर्णय लिया है कि शिक्षकों के सम्मान के नाम पर अवैध वसूली की गई। इसके लिए तमाम शिक्षकों से दस से बीस हजार रुपये तक कार्यक्रम खर्च के नाम पर वसूली की गई। शिक्षकों का कहना है कि खर्च के लिए शासन की तरफ से स्पष्ट निर्देश था। इसके बाद भी अवैध वसूली की गई। उच्च स्तरीय जांच में इसका पूरी तरह खुलासा हो जाएगा।
यह बोले अधिकारी
प्रभारी डीआईओएस आनंदकर पांडेय ने कहा कि चयन समिति ने जो नाम सुझाए थे, उसे सूचीबद्ध कर सम्मानित कराया गया। किसी शिक्षक या संगठन की कोई आपत्ति प्राप्त होती है तो उसका विधिवत संज्ञान लिया जाएगा। उधर, बीएसए भोलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सभी ब्लॉकों से सूची मंगाई गई थी। सूची फाइनल करने के लिए ज्यादा समय नहीं था। फिर भी यथासंभव कोशिश कर ज्यादातर नए व पात्र नाम शामिल किए गए। आगे यह ध्यान रखा जाएगा कि अन्य शिक्षकों को भी ज्यादा से ज्यादा मौका दिया जा सके।