जलालपुर (अंबेडकरनगर)। करीब ढाई दशक पहले बड़ेपुर में बना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बदहाली का शिकार है। परिसर में गंदगी व टूटी बाउंड्रीवाल के साथ ही भवन में लगीं खिड़की व दरवाजे टूट गए हैं। कर्मचारियों की कमी के साथ ही दवाओं के संकट से मरीजों का यहां से मोहभंग हो चुका है। वे सीएचसी या किसी दूसरे अस्पताल जाना बेहतर समझते हैं।
ढाई दशक पहले स्थापित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़ेपुर से करीब 30 हजार आबादी जुड़ी है। काफी समय से अस्पताल बदहाल होने से अब यहां कम मरीज आते हैं। ‘अमर उजाला’ की टीम बीते दिन सुबह 10 बजे अस्पताल पहुंची तो परिसर में सन्नाटा पसरा था। चारों ओर उगी झाड़ियां देख लग रहा था कि काफी समय से सफाई नहीं हुई।
पश्चिम और दक्षिण में बनी दीवार भी टूटी थी। खिड़की व दरवाजे क्षतिग्रस्त दिखे। टीम जब अंदर पहुंची तो कुछ कर्मचारी आपस में बातचीत में व्यस्त थे। चिकित्सक की कुर्सी खाली थी। पूछने पर पता चला कि चिकित्सकों के दो पद स्वीकृत हैं, जबकि सिर्फ डॉ. भास्कर यहां तैनात हैं। वे भी इमरजेंसी ड्यूटी के लिए नगपुर सीएचसी गए हैं। वहीं लैब टेक्नीशियन के स्वीकृत दो पदों के सापेक्ष सिर्फ एक की ही तैनाती है। मरीजों के उपचार की जिम्मेदारी ज्यादातर फार्मासिस्ट सतीश चंद्र वर्मा के ही भरोसे रहती है।
पूछताछ में कर्मचारियों ने बताया कि पैथालॉजी की सुविधा है, मगर शुगर टेस्ट किट न होने से हफ्ते में दो बार ही इसकी जांच हो पाती है। स्थानीय निवासी रामसेवक, सुरेंद्र व राकेश कुमार आदि ने बताया कि कभी दवा नहीं तो कभी डॉक्टर नहीं मिलते हैं, जिससे यहां आने वाले मरीजों की संख्या कम हो गई है।
अस्पताल में इलाज की व्यवस्था ठीक
अस्पताल में उपचार की व्यवस्था ठीक है। इमरजेंसी थी, इसलिए यहां तैनात चिकित्सक को नगपुर बुलाया गया। उपलब्ध संसाधनों में मरीजों का समुचित इलाज हो रहा है।
डॉ. राकेश कुमार, सीएचसी प्रभारी