फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मेडिकल कॉलेज में गलत संकेतक से दिक्कत

विज्ञापन
अंबेडकरनगर के राजकीय मेडिकल कॉलेज में गलत संकेत से परेशान होते मरीज। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
विज्ञापन
अंबेडकरनगर। यदि इलाज के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर जा रहे हैं, तो जरा संभल कर। पहले पता कर लें कि जिस बीमारी का इलाज कराने के लिए वे मेडिकल कॉलेज गए हैं, उसका इलाज किस ब्लॉक में होता है। दरअसल मेडिकल कॉलेज में कक्षों के बाहर जो संकेत दीवारों पर बनाए गए हैं, उनमें ज्यादातर गलत हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीते लगभग पांच वर्ष से ब्लॉक ए की दूसरी मंजिल पर नाक, कान व गला की बीमारियों के इलाज का संकेत चिह्न बनाया गया है, जबकि इस ब्लॉक में इनका इलाज होता ही नहीं है। संबंधित बीमारियों का इलाज ब्लॉक बी में होता है। ब्लॉक ए में चेस्ट व टीबी का इलाज होता है, जिसका संकेत इस ब्लॉक में नहीं लिखा है। नतीजा यह है कि नाक, कान व गला की बीमारियों का इलाज कराने वाले मरीजों को इधर उधर भटकने को मजबूर होना पड़ता है। और तो और ब्लॉक ए की दूसरी मंजिल पर जाने के लिए दो लिफ्ट हैं, लेकिन वे लंबे समय से खराब हैं। ऐसे में इस ब्लॉक पर सांस के मरीजों को इलाज के लिए सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ता है।
विज्ञापन

मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दूरदराज के जनपदों में न जाना पड़े, इसके लिए लगभग डेढ़ दशक पहले सद्दरपुर में राजकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना की गई थी। इससे मरीजों व तीमारदारों ने राहत की सांस ली थी। हालांकि समय बीतने के साथ ही उनकी बेहतर इलाज की उम्मीदों को तगड़ा झटका लगा है। मरीजों को बेहतर इलाज देने को लेकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए विभिन्न ब्लॉकों में जो संकेत चिह्न दीवारों पर बनाए गए हैं, वह पूरी तरह से गलत हैं। संकेत चिह्न कहीं और का रास्ता दिखाते हैं, जबकि इलाज कहीं और होता है।
ब्लॉक ए की दूसरी मंजिल पर नाक, कान व गला समेत कई बीमारियों के लिए इलाज का संकेत चिह्न दीवारों पर बना हुआ है, जबकि इन बीमारियों का इलाज इस ब्लॉक में होता ही नहीं है। इन सभी बीमारियों का इलाज ब्लॉक बी में होता है। ब्लॉक ए की दूसरी मंजिल पर चेस्ट व टीबी का इलाज होता है। इसका इस ब्लाक में कोई संकेत चिह्न नहीं है। नतीजा यह है कि संकेत चिह्न देखकर मरीज ब्लॉक ए की दूसरी मंजिल पर पहुंच जाते हैं, लेकिन वहां जाने के बाद उन्हें पता चलता है कि ब्लॉक बी में इन बीमारियों का इलाज होता है। और तो और ब्लाक ए की दूसरी मंजिल पर जाने के लिए दो लिफ्ट हैं, लेकिन लंबे समय से खराब पड़ी हैं। ऐसे में सांस के मरीजों को इलाज के लिए सीढ़ियों का सहारा लेने को मजबूर होना पड़ता है। इससे उन्हें व उनके तीमारदारों को विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन

तीमारदारों ने जताई नाराजगी
राजकीय मेडिकल कॉलेज में मिले तीमारदार राजेश कुमार व गंगाराम ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि मरीजों की समस्याओं के निस्तारण को लेकर जिम्मेदारों द्वारा कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। लिफ्ट खराब होने के चलते सीढ़ियों के सहारे दूसरी मंजिल पर जाना पड़ता है। तीमारदार दुर्गेश व मेवालाल ने कहा कि एक तो लिफ्ट खराब है, उस पर से संकेत चिंह भी भ्रामक हैं। इससे और भी मरीजों को परेशानी हो रही है।
मरीजों का रखा जाता ध्यान
मरीजों को किसी भी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। लिफ्ट को शीघ्र ही दुरुस्त करा दिया जाएगा। मरीजों का समुचित ढंग से इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है। संकेतों को दिखवाया जाएगा। -डॉ. संदीप कौशिक, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें