अंबेडकरनगर। जलालपुर के सपा विधायक सुभाष राय को मनाने के लिए सपा नेतृत्व ने बड़ा दांव चला है। उन्हें पांच माह बाद होने वाले चुनाव में एमएलसी बनाने का भरोसा दिया गया है। इससे सुभाष राय के कदम बगावत की तरफ बढ़ने से फिलहाल रुक गए हैं, हालांकि चुनाव के लिए समर्थकों का दबाव बना हुआ है। इस बीच उन्हें बीजेपी में शामिल होने के लगातार ऑफर आ रहे हैं। अगले 72 घंटों में सपा प्रमुख से सुभाष राय की मुलाकात की संभावना है। सुभाष जलालपुर से टिकट कटने पर सपा जिलाध्यक्ष का पद स्वीकार करने से पहले ही इंकार कर चुके हैं।
समाजवादी पार्टी के लिए अकबरपुर व जलालपुर में प्रत्याशियों के चयन को लेकर मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। अकबरपुर सीट पर पूर्व मंत्री राममूर्ति वर्मा के सकारात्मक रुख ने पार्टी नेतृत्व को राहत जरूर दी है, लेकिन जलालपुर सीट पर पेच फंसा हुआ है। यहां से वर्ष 2017 में हुए सामान्य चुनाव में बसपा के टिकट पर रितेश पांडेय विधायक चुने गए थे। बाद में वह बसपा से लोकसभा सदस्य चुन लिए गये। बाद में उपचुनाव में यहां से सपा के सुभाष राय विधायक निर्वाचित हुए थे।
अब विधानसभा चुनाव के ठीक पहले सांसद रितेश पांडेय के पिता व बसपा नेता पूर्व सांसद राकेश पांडेय ने तमाम पंचायत प्रतिनिधियों व ब्लॉक प्रमुखों के साथ समाजवादी पार्टी की सदस्यता ले ली। वे वर्ष 2002 में सपा के ही टिकट पर जलालपुर से विधायक निर्वाचित हुए थे। लेकिन बाद में बसपा में शामिल होकर सांसद बन गये। अब उनके सपा में शामिल होने से उनका जलालपुर से टिकट लगभग तय माना जा रहा है।
इसके संकेत स्वयं सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने सुभाष राय व जिले के अन्य सपा नेताओं को दे भी दिए थे। इसके बाद से सुभाष राय ने चुप्पी साध रखी है। लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा समेत कई अन्य दल के नेता उनके संपर्क में हैं। इसकी भनक भी सपा नेतृत्व को है। सुभाष राय को मनाने के लिए सपा नेतृत्व ने अब बड़ा दांव चला है। उन्हें लगभग पांच माह बाद होने वाले चुनाव में एमएलसी बनाने का भरोसा दिया गया है।
जिलाध्यक्ष के पद पर नहीं बनी बात
पार्टी सूत्रों के अनुसार जलालपुर से टिकट कटने से दुखी सुभाष राय को मनाने के लिए पार्टी ने उन्हें जिलाध्यक्ष की कुर्सी भी आफर की थी। लेकिन उन्होंने यह कहते हुए जिलाध्यक्ष पद लेने से इंकार कर दिया था कि मैं अपने क्षेत्र की जनता को समय नहीं दे पाऊंगा। संपूर्ण जलालपुर विधानसभा क्षेत्र मेरा अपना घर व परिवार है।
पूर्व मंत्री ने भी दिया दखल
अकबरपुर से खुद का टिकट कटने के बाद से जिन पूर्व मंत्री राममूर्ति वर्मा को लेकर पार्टी छोड़ने की अटकलें बढ़ गई थीं, उन्होंने खुद विधायक सुभाष राय को फोन कर उन्हें समझाने की कोशिश की। पूर्व मंत्री ने अमर उजाला को बताया कि मैंने उन्हें फोन कर कहा कि पार्टी नेतृत्व के साथ हम सभी को खड़े रहने की जरूरत है। आने वाला कल समाजवादी सरकार के माध्यम से जनता की सेवा करने का है।
चर्चा में रहे विधायक की पोस्ट
सुभाष राय ने बीते गुरुवार को फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लिखा कि मैं अपने लोगों के बीच बैठकर दही-चूरा और भेली-दाना खाने वाला हूं। वे लोग और होंगे जो काजू कतली खाते होंगे। हम कल भी आपके बीच आते थे अब भी आएंगे। जलालपुर के जन जन के साथ मिलकर विकास की गंगा बहाएंगे। मेरा रिश्ता कभी चुनाव की सरगर्मी का मोहताज नहीं रहा। जनता व उसकी जरूरत हमेेशा मेरे जेहन में रही है। इनसे अलग तो अब परवरदीगार ही कर सकता है। जलालपुर से रिश्ता विकास का है। मामला अब जलालपुर और उसके सुुभाष का है। यह पोस्ट समूचे क्षेत्र में चर्चा का विषय है।
आफर तो हैं, लेकिन मैं सपा में हूं
सुभाष राय ने स्वीकार किया कि मेरे पास बीजेपी से लगातार ऑफर आ रहे हैं। मैंने खुद उन फोन नंबरों को पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव को दिखाया है। अब एमएलसी बनाने की बात कही गई है। लेकिन मैं सीधे तौर पर जलालपुर की जनता के सुख दुख में भागीदार रहना चाहता हूं। मैं फील्ड की राजनीति करने वालों में से हूं। इस बारे में जल्द ही पार्टी सुप्रीमो से बात होगी।