अंबेडकरनगर। ऑपरेशन कराने के लिए यदि जिला अस्पताल जा रहे हैं, तो अपने साथ ब्लेड, सुई, धागा, कॉटन व ग्लब्स आदि सामान भी लेकर आएं। कारण यह है कि जिला अस्पताल में ऑपरेशन संबंधित ऐसी जरूरी सामग्री उपलब्ध ही नहीं है। इतना ही नहीं, यदि यह उम्मीद हो कि जिला अस्पताल में चिकित्सक की ओर से लिखी गईं सभी दवाएं भी उपलब्ध हो जाएंगी, तो यह भी गलत है। स्टोर में मौजूद दवाओं की जो लिस्ट चिकित्सकों को दी गई है, वे उसी के अनुसार दवाएं लिखते हैं, लेकिन ज्यादातर दवाएं न होने का हवाला देते हुए मरीजोें से बाहर से खरीदने के लिए कहा जाता है। ऐसे में मजबूरन मरीजों व उनके तीमारदारों को बाहर से दवाएं लेनी पड़ती है।
सस्ते में बेहतर इलाज व जरूरी सुविधाएं मिलने की उम्मीद लगाकर जिला अस्पताल जाने वाले मरीजों व उनके तीमारदारों को तगड़ा झटका लग रहा है। न तो समुचित इलाज सुनिश्चित हो पाता है और न ही जरूरी दवाएं ही जिला अस्पताल में मिल पा रही हैं। और तो और ऑपरेशन के लिए उपयुक्त होने वाली सामग्री की उपलब्धता भी समुचित ढंग से अस्पताल में नहीं हो रही है। इससे बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों व उनके तीमारदारों को तगड़ा झटका लग रहा है। इतना ही नहीं, जिला अस्पताल परिसर में स्थित जन औषधि केंद्र का भी समुचित लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
नतीजा यह है कि प्रतिदिन मरीजों को एक तरफ जहां ज्यादातर दवाएं निजी मेडिकल स्टोर से खरीदने को विवश होना पड़ रहा है, तो वहीं ऑपरेशन से पहले मरीज को सुई, धागा व ग्लब्स अस्पताल प्रशासन को उपलब्ध कराना पड़ता है। इससे मरीजों व उनके तीमारदारों को एक तरफ जहां विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, तो वहीं उन्हें आर्थिक चपत भी लगती है। अक्सर देखा गया है कि जानकारी के अभाव में ऑपरेशन के लिए मरीज अस्पताल पहुंच जाते हैं, लेकिन वहां उन्हें सुई, धागा व ग्लब्स बाहर से लाने के लिए कहा जाता है। ऐसा होने पर उन्हें दिक्कतें होती हैं। बुधवार को अमर उजाला टीम ने जिला अस्पताल पहुंचकर इस संबंध में मरीजों व उनके तीमारदारों से वार्ता की, तो उनका दर्द कुछ इस प्रकार से छलक उठा।
बाहर से लाया सामान, तब हुआ ऑपरेशन
पड़ोसी जनपद अयोध्या के गोसाईगंज थाना अंतर्गत भटपुरा गांव निवासी राकेश कुमार ने कहा कि वह तीन दिन पहले जिला अस्पताल आए थे। रीढ़ की हड्डी के बगल फोड़ा निकल आया था, उसका ऑपरेशन कराना था। ऑपरेशन से पहले मुझसे सुई, धागा व ग्लब्स लाने के लिए कहा गया। मजबूरन यह सामान बाहर से मंगाना पड़ा। इसके बाद ही ऑपरेशन हो सका।
लिखीं पांच दवा, मिलीं सिर्फ दो
बनगांव डिहवा निवासी संगम ने कहा कि वह अपने नाना जगराम को लेकर जिला अस्पताल पहुंचा था। नाना के पैर में चोट लगी थी। चिकित्सक ने पांच दवाएं लिखीं। दो दवाएं ही मिलीं, जबकि बी काम्लेक्स, जीनॉक्स व ट्रोपेप्सोजेम दवा अस्पताल में नहीं थी। ऐसे में उसे बाहर स्थित मेडिकल स्टोर से लेना पड़ा। नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अस्पताल में दवाएं उपलब्ध होनी चाहिए।
अस्पताल से नहीं मिलीं तीन दवाएं
मुरादाबाद मोहल्ला निवासी पूजा जिला अस्पताल इलाज के लिए पहुंची थीं। बताया कि उसके हाथ में दर्द है। चिकित्सक ने पर्चे पर पांच दवाएं लिखीं। दो दवाएं तो अस्पताल से ही मिल गई, लेकिन तीन दवाएं बी काम्लेक्स, सिप्रोलाक्सी व मेट्रोजेल अस्पताल में नहीं मिलीं। बाद में मजबूरन उसे निजी मेडिकल स्टोर से संबंधित दवाओं को खरीदना पड़ा।
नहीं मिली कान की ड्रॉप
सेनपुर निवासी प्रमिला ने कहा कि उसके कान में तकलीफ थी। उसने इसके लिए जिला अस्पताल के नाक, कान गला चिकित्सक को दिखाया। उन्होंने अन्य दवाओं के साथ एक ड्रॉप लिख दी। दवाएं तो अस्पताल में मिल गई, लेकिन ड्रॉप पोटेडएसी अस्पताल में नहीं मिल सकी। नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अस्पताल में सभी जरूरी दवाएं उपलब्ध हो सके, इसके लिए जिम्मेदारों को गंभीरता दिखानी चाहिए।
उपलब्ध हैं सभी दवाएं
जिला अस्पताल में सभी तरह के रोगों की दवाएं उपलब्ध हैं। अलग-अलग रोग की जो दवाएं हैं, उनकी लिस्ट चिकित्सकों को दे दी गई हैं। इसी के अनुसार ही चिकित्सक दवाएं लिखते भी हैं। कोई मरीज अलग से दवा लिखने की बात कहकर अलग से दवा लिखवा लेते हैं, वही दवाएं मरीज बाहर से लेते होंगे। ऑपरेशन संबंधित सामग्री अस्पताल में उपलब्ध है। इसे लेकर किसी भी प्रकार की शिकायत उन्हें नहीं मिली है।
डॉ. ओमप्रकाश, सीएमएस