अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल में गर्मी से मरीजों का हाल बेहाल है। हालात यह है कि किसी को हाथ के पंखे का प्रबंध करना पड़ा है, तो किसी ने पैडल फैन घर से मंगवा रखा है। वार्डों में लगे पंखे इस भीषण गर्मी में सिर्फ नाममात्र को चल रहे। उनके कंडेंसर आदि खराब हो गए हैं, लेकिन बदलवाने की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन की इस उदासीनता के बीच जिला अस्पताल को निर्बाध बिजली मिलने के लिए जो फीडर अलग से स्थापित किया गया है, वह विद्युत अधिकारियों की लापरवाही के कारण लगभग 36 घंटे तक ठप रहने के बाद बुधवार को बन पाया। इन सबके चलते ही जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों व तीमारदारों को गर्मी में और ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार को अमर उजाला टीम ने वार्डों में पंखों की व्यवस्था का जायजा लिया, तब जाकर अस्पताल प्रशासन हरकत में आया। भरोसा दिलाया कि जल्द ही कंडेंसर बदलवा दिए जाएंगे।
जिला अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों व उनके साथ मौजूद तीमारदारों की मुश्किलें अघोषित विद्युत कटौती से ज्यादा बढ़ा रही हैं। जिला अस्पताल में कुल छह वार्ड हैं। इन वार्डों में लगे ज्यादातर पंखे लंबे समय से रिपेयरिंग न होने से महज हाथी के दांत साबित हो रहे हैं। किसी के कंडेंसर खराब हैं, तो किसी में अन्य प्रकार की गड़बड़ी है। नतीजा यह है कि बिजली रहने के बाद भी वह ठीक ढंग से नहीं चल पा रहे। ऐसे में समुचित हवा मरीजों तक नहीं पहुंच पा रही है। जब भीषण गर्मी का दौर चल रहा है और आसमान से आग बरस रही है, तब पंखों के सुचारु रूप से काम न करने से मरीजों व उनके तीमारदारों को व्यापक मुश्किलें हो रही हैं।
इन्हीं दिक्कतों के बीच जिला अस्पताल को कोटवा महमदपुर से उपलब्ध होने वाली विद्युत आपूर्ति के लिए बिछाई गई अंडरग्राउंड केबल बीते सोमवार को खराब हो गई। इसे बुधवार दोपहर तक दुरुस्त नहीं कराया जा सका था। विद्युत आपूर्ति के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तो की गई, लेकिन इसका समुचित लाभ वार्डों में भर्ती मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। उधर अधिशाषी अभियंता विद्युत अकबरपुर वीके पटेल ने बताया कि अंडरग्राउंड केबिल में गड़बड़ी हुई थी, जिसे बुधवार को दुरुस्त करा दिया।
स्वयं पंखे की व्यवस्था कर रहे मरीज
वार्डों में भर्ती मरीजों को गर्मी से राहत दिलाने के लिए तीमारदारों को स्वयं व्यवस्था करनी पड़ रही है। बुधवार को जब अमर उजाला टीम जिला अस्पताल के विभिन्न वार्डों में पहुंची, तो वार्ड नंबर तीन के बेड संख्या एक पर भर्ती बेवाना के मरीज जितेंद्र ने कहा कि वार्ड में जो पंखे लगे हैं, वह बस सिर्फ हिलते ही हैं। ऐसे में गर्मी से राहत के लिए घर से फर्राटा फैन मंगाना पड़ा है। वार्ड नंबर एक के बेड संख्या 28 पर भर्ती मालीपुर के मरीज राजबहादुर ने कहा कि घर से हाथ का पंखा मंगाया है। परिवार के सदस्य दिन व रात दोनों समय हाथ के पंखे से राहत देने की कोशिश करते रहते हैं। नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि कई बार पंखा दुरुस्त कराने के लिए अस्पताल प्रशासन से शिकायत की, लेकिन कोई सुध नहीं ली गई। वार्ड संख्या एक के बेड संख्या तीन पर भर्ती टांडा के रामजीत ने कहा कि एक तो वार्ड में पंखों की संख्या कम है। उस पर जो हैं भी, उनसे हवा ठीक से नहीं निकलती है। इससे भीषण गर्मी में विभिन्न प्रकार की मुश्किलें उठानी पड़ रही हैं। कहा कि राहत के लिए घर से पंखा मंगाना पड़ा है।
मंगलवार रात दो बार ठप हुई बिजली
जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों ने बताया कि मंगलवार रात दो बार बिजली आपूर्ति ठप हुई। सबसे पहले रात 11 बजे करीब बिजली आपूर्ति अचानक ठप पड़ गई। इससे अंधेरा छा गया। सभी पंखे भी बंद हो गए। करीब 15-20 मिनट तक यह स्थिति वार्डों में बनी रही। इसके बाद जब जनरेटर चला, तब जाकर मरीजों को पंखे की हवा उपलब्ध हो पाई। बाद में बिजली आने पर जनरेटर बंद कर दिया गया। कुछ देर तक मरीजों को राहत मिली ही थी कि रात ढाई बजे करीब एक बार फिर से बिजली चली गई। इससे मरीजों व तीमारदारों को दोबारा विद्युत संकट से जूझना पड़ा। कुछ बाद जनरेटर चला, तो फिर से पंखे की हवा मिल पाई। रात में दो अलग अलग समय पर बिजली आपूर्ति ठप पड़ जाने से न तो मरीज और न ही उनके तीमारदार ठीक से सो पाए।
रिपयेर कराए जा रहे पंखे
वार्डों में लगे पंखों को रिपयेर करने के निर्देश दिए गए हैं। गुरुवार को सभी पंखे रिपेयर कर दिए जाएंगे। इसके अलावा शीघ्र ही सात कूलर भी जिला अस्पताल को उपलब्ध हो जाएंगे। इससे मरीजों व तीमारदारों की सुविधा बढ़ेगी। -डॉ. ओमप्रकाश, सीएमएस