अंबेडकरनगर। लोकसभा चुनाव की तैयारियों में अधिकारियों व कर्मचारियों की व्यस्तता के चलते लगभग आठ हजार आय, जाति, निवास व जन्म प्रमाणपत्र लंबित हैं। आवेदक लगातार जिम्मेदारों के कार्यालय का चक्कर लगा रहे लेकिन उन्हें प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं हो रहा। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं व कॉलेजों में प्रवेश के लिए आवश्यक प्रमाणपत्र के लिए आवेदकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
यूपी बोर्ड के साथ ही सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड के परीक्षा परिणाम शीघ्र ही घोषित होने वाले हैं। ऐसे में इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने वाले छात्र-छात्राएं आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए या तो प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने की तैयारी में हैं या फिर स्नातक में प्रवेश करने के लिए आवेदन करना शुरू कर दिए हैं। इसके लिए आय, जाति व निवासी प्रमाणपत्र की जरूरत है।
इसके अलावा एलकेजी व यूकेजी में प्रवेश करने के लिए छात्र-छात्राओं को जन्म प्रमाणपत्र की जरूरत पड़ती है। इन सभी प्रकार के प्रमाणपत्र के लिए आवेदन तो किए गए हैं लेकिन आवेदकों को लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। दरअसल लोकसभा चुनाव की तारीख की घोषणा होने के चलते अधिकारी व कर्मचारी चुनाव संबंधी राजकीय कार्यों में व्यस्त हो गए हैं। ऐसे में प्रमाणपत्र पर डिजिटल हस्ताक्षर न होने से प्रमाणपत्र के निर्गत होने की गति अत्यंत धीमी हो गई है।
मालूम हो कि जिले में एक हजार से अधिक जनसेवा केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों के माध्यम से प्रतिमाह औसतन 11 हजार आवेदन आय, जाति, निवासी व जन्म प्रमाणपत्र के लिए होते हैं। ई-डिस्ट्रिक्ट कार्यालय के अनुसार लगभग आठ हजार प्रमाणपत्र लंबित हैं।
प्रमाणपत्र न मिलने से हो रही परेशानी
अकबरपुर नगर के मीरानपुर निवासी गुलनाज ने कहा कि पुत्र व पुत्री के जन्म प्रमाण पत्र के लिए 10 फरवरी को आवेदन किया था। अब तक प्रमाणपत्र हासिल नहीं हो सका है। इससे दोनों बच्चों के विद्यालय में प्रवेश होने में समस्या हो रही है। अकबरपुर के अंकुश ने कहा कि 15 फरवरी को जाति प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था, अभी तक नहीं मिला। प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होना है, यदि समय रहते प्रमाणपत्र नहीं मिला तो समस्या हो सकती है। जलालपुर की अनुष्का व टांडा की शाइस्ता ने कहा कि इंटरमीडिएट का परिणाम आने के बाद स्नातक में प्रवेश करने के लिए अलग-अलग विश्वविद्यालयों में आवेदन करना है। आय, जाति व निवास प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था लेकिन अभी तक नहीं मिला।
किसानों का सत्यापन भी मुश्किल
खाद्य एवं विपणन अधिकारी कार्यालय के अनुसार लोकसभा चुनाव में व्यस्तता का प्रतिकूल प्रभाव गेहूं की बिक्री करने वाले किसानों के सत्यापन पर पड़ रहा है। गेहूं बिक्री के लिए पांच हजार 206 किसानों ने पंजीकरण कराया है। अब तक तीन हजार 776 किसानों का सत्यापन हो चुका है। 1430 किसानों का सत्यापन होना शेष है।
रुका नहीं है काम
प्रमाणपत्र निर्गत होने का कार्य लगातार हो रहा है। गति धीमी जरूर हुई है लेकिन नियमित रूप से प्रमाण पत्र बन रहे हैं। जो प्रमाणपत्र लंबित हैं उनमें से तमाम में अभी समयबद्धता समाप्त नहीं हुई है। कोशिश है कि तेजी से प्रमाण पत्र निर्गत किए जाएं। - एजाज रसूल, मैनेजर ई डिस्ट्रिक्ट