अंबेडकरनगर। ईद-उल-अजहा (बकरीद) को उत्साहपूर्वक मनाएं, लेकिन इस बात का जरूर ध्यान रखें कि इसे लेकर केंद्र व प्रदेश सरकार ने जो गाइडलाइन जारी की है, उसका शत-प्रतिशत पालन करें। कोई ऐसा कार्य न करें, जिससे किसी के दिल को ठेस पहुंचे। ईद की विशेष नमाज को लेकर जो गाइडलाइन जारी है, उसी के अनुसार नमाज अदा करें। खुले में कुर्बानी न करें। एक दूसरे की मदद करें।यह अपील सोमवार को धर्मगुरुओं व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आम नागरिकों से की।
21 जुलाई को ईद-उल-अजहा पर्व मनाया जाएगा। इसे लेकर जरूरी तैयारियां तेज कर दी गई हैं। कोरोना महामारी को देखते हुए पर्व को लेकर प्रदेश सरकार ने विभिन्न प्रकार की गाइडलाइन जारी की है। सोमवार को इसे लेकर उलेमा व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे शत-प्रतिशत गाइडलाइन का पालन करें।
सामाजिक संस्था अल इमाम चैरिटेबल फाउंडेशन के चेयरमैन ख्वाजा शफाअत हुसैन ने अपील करते हुए कहा कि कुर्बानी करते समय इस बात का जरूर ध्यान दें कि वह खुले में न हो। जानवर के मलबे को गड्ढा खोदकर गाड़ दें। नमाज को लेकर जो गाइडलाइन जारी की गई है, उसी के अनुसार पालन करें। मेंहदी एजुकेशनल एकेडमी के प्रबंधक व सामाजिक कार्यकर्ता मेंहदी रजा ने कहा कि सिर्फ जानवर की कुर्बानी से अल्लाह खुश होने वाला नहीं है। अपने अंदर की बुराइयों को कुर्बान करने से अल्लाह खुश होगा। ऐसे में शासन की ओर से जारी गाइडलाइन का पालन करते हुए पर्व मनाएं।
उलेमा बोर्ड अंबेडकरनगर के प्रवक्ता मौलाना सै. नूरुल हसन ने अपील करते हुए कहा कि ईदगाहों व मस्जिदों में 50 से अधिक लोग नमाज अदा करने न जाएं। खुले में जानवरों की कुर्बानी न दें। जिन जानवरों पर प्रतिबंध है, उसकी कुर्बानी कतई न दें। मौलाना सै. मोहम्मद अब्बास ने कहा कि शासन की ओर से जो गाइडलाइन जारी की गई है, उसी के अनुसार पर्व मनाएं। एक दूसरे की मदद करें।