अंबेडकरनगर। जिले में एक अरब से अधिक की लागत से निर्माणाधीन पंचायत भवनों के निर्माण में तेजी नहीं आ पा रही है। शासन स्तर से भले ही दो अक्तूबर तक भवन को पूरा कर उनमें मिनी सचिवालय शुरू करने का निर्देश है, लेकिन जिले में ऐसा हो पाना अभी संभव नहीं लग रहा है। कारण यह है कि शासन से जिन 446 पंचायत भवनों का निर्माण कराया जा रहा है, उनमें से 405 ऐसे हैं, जिनमें अभी लगभग 10 से 20 प्रतिशत काम अधूरा है, वहीं 41 पंचायत भवन ऐसे हैं, जिनका कार्य अभी 50 प्रतिशत भी नहीं हो सका है। ऐसे में शासन के इस मिनी सचिवालय से मिलने वाली सुविधाओं के लाभ के लिए संबंधित ग्राम पंचायतों के वाशिंदों को इंतजार करना पड़ेगा।
प्रदेश की योगी सरकार ने ग्राम पंचायतों में बड़े स्तर पर मिनी सचिवालय के निर्माण का कार्य शुरू किया है। जिले में ही सरकार ने 446 ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की। लगभग 22 से 25 लाख की लागत से बन रहे इन पंचायत भवनों पर सरकार का एक अरब रुपये से अधिक का खर्च आ रहा है। शासन की मंशा है कि इन पंचायत भवनों का निर्माण हो जाने से आम नागरिकों को कई सुविधाएं मिलेंगी। एक तरफ जहां पंचायत स्तरीय अधिकारी व कर्मचारी ग्रामीणों को नियमित रूप से इस स्थान पर मिलेंगे, जिससे उन्हें अपना काम निस्तारित कराने में आसानी होगी। इसके अलावा सरकार की योजनाओं का लाभ मिलने में भी मदद होगी। सरकार तेजी से सभी योजनाओं को ऑनलाइन कर रही है। ऐसे में इस पंचायत भवन पर सरकार द्वारा पंचायत सहायकों की नियुक्ति भी की जा रही है। शासन की मंशा है कि पंचायत सहायकों की नियुक्ति होने के बाद जनसेवा केंद्र संचालकों की मनमानी रोकी जा सकेगी, साथ ही ग्रामीणों को प्राथमिकता पर सरकार की योजनाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन व अन्य कार्यों को कराने में आसानी होगी।
सरकार इसी कार्यकाल में इन पंचायत भवनों से सेवाओं को शुरू करने के लिए जोरशोर से काम कर रही है। कोरोना महामारी होने के बावजूद पंचायत भवनों के निर्माण में धनाभाव का संकट नही होने दिया। शासन ने आगामी दो अक्तूबर तक का लक्ष्य दिया है कि अधूरे पड़े पंचायत भवनों को जल्द से जल्द पूरा कराकर वहां पर इंटरनेट व विद्युत आपूर्ति की सुविधा मुहैया कराने का निर्देश है। शासन की मंशा है कि गांधी जयंती के मौके पर जिले के सभी 902 ग्राम पंचायतों में मिनी सचिवालय पर काम शुरू हो जाए। परंतु जिले में पंचायत भवनों के निर्माण की स्पीड ठीक नहीं है। सीडीओ घनश्याम मीणा के निर्देश के बावजूद अब तक निर्माणाधीन 446 पंचायत भवनों में से 405 का लगभग 20 प्रतिशत कार्य अधूरा है, जबकि 41 पंचायत भवन ऐसे हैं जिनका 50 प्रतिशत कार्य भी पूरा नही हो सका है। ऐसे में 10 दिन में इन पंचायत भवनों का निर्माण कार्य पूरा हो पाना संभव नहीं लग पा रहा है और शासन की मंशानुरूप 2 अक्तूबर को मिनी सचिवालय के संचालित होने की उम्मीद भी कम ही है।
इन गांवों में अधूरे हैं पंचायत भवन
जिले के 446 ग्राम पंचायतों में निर्माणाधीन पंचायत भवनों में से अमिया बाभनपुर, मोहिउद्दीनपुर, पिपरी सैदपुर, पियारेपुर, दौलतपुर, महमूदपुर, इस्माइलपुर बेल्दहां, बहाउद्दीनपुर, फरीदपुर, पियारेपुर, देईपुर, बिलासपुर, बिहरोजपुर, दानपुर, धौरहरा, सद्दरपुर, भसड़ा, बिलहरी व नरायनपुर सहित 41 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां पर पंचायत भवनों का निर्माण कार्य काफी धीमी गति से चल रहा है। ऐसे में संभव नहीं है कि 2 अक्तूबर को इन पंचायत भवनों पर कार्य कैसे शुरू हो पाएगा। खास बात यह कि बड़ी संख्या में पंचायत भवन ऐसे हैं, जहां पर अब तक विद्युत आपूर्ति व इंटरनेट की सुविधा भी नहीं हो पाई है।
संचालित होंगे 600 मिनी सचिवालय
डीपीआरओ अवनीश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि गांधी जयंती के मौके पर जिले के 600 मिनी सचिवालय को संचालित करने की तैयारी है। इसके लिए संबंधित सचिवालयों को चिह्नित किया जा चुका है। उन पर सभी जरूरी व्यवस्थाएं पूरी की जा रही हैं। इसमें नए व पुराने सभी पंचायत भवन शामिल हैं। जिन केंद्रों पर ऑप्टिकल केबल नहीं पहुंची हैं, वहां निजी इंटरनेट की व्यवस्था से काम शुुरू कराया जाएगा। ऑप्टिकल केबल का कार्य देख रहे सत्यप्रकाश ने बताया कि काफी संख्या में पंचायत भवनों तक ऑप्टिकल केबल बिछाया जा चुका है। कुछ स्थानों पर लंबे समय से प्रयोग न होने के चलते क्षतिग्रस्त भी हो गया है। उसे भी दुरुस्त करने का कार्य चल रहा है।
कार्य पूरा न करने पर होगी कार्रवाई
पंचायत भवनों के निर्माण को लेकर लगातार समीक्षा की जा रही है। कार्यों में काफी तेजी आयी है। शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुसार अधिकांश पंचायत भवन का कार्य भी पूरा कर लिया जाएगा। विद्युतीकरण व इंटरनेट की सुविधाएं भी सभी पंचायत भवन तक पहुंचायी जा रही है। जिन स्थानों पर कार्य पूरा नही होगा तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई भी की जाएगी।
-घनश्याम मीणा, सीडीओ