अंबेडकरनगर। अकबरपुर नगर के मीरानपुर स्थित मदरसा इस्लामिया स्कूल में गोष्ठी का आयोजन हुआ। तालीम की अहमियत विषय पर आयोजित गोष्ठी में कहा गया कि किसी भी समाज व देश का विकास तभी संभव है, जब शत-प्रतिशत साक्षरता तय हो। ऐसे में हम सभी की जिम्मेदारी है कि अपने बच्चों को बेहतर तालीम दें। न सिर्फ बेहतर तालीम दें, बल्कि इसके साथ ही उन्हें अच्छे संस्कार भी दें। कारण यह कि बगैर अच्छे संस्कार के हासिल की गई शिक्षा सिर्फ और सिर्फ काटों भरा ताज ही होती है।
गोष्ठी के मुख्य अतिथि सितारे उर्दू अवार्ड से सम्मानित शिक्षक मोहम्मद असलम खान ने कहा कि शिक्षा एक सुगंधित फूल की तरह होती है, शिक्षा एक रोशनी है। बेहतर शिक्षा हासिल करने वाले की सुगंध व रोशनी चारों तरफ फैलती है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज व देश का विकास तभी संभव है, जब शत-प्रतिशत साक्षरता हो। इसके आधार पर ही हम किसी भी सफलता को आसानी के साथ हासिल कर सकते हैं। संचालन कर रहेे मॉडर्न मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद जमाल अहमद अंसारी ने कहा कि बेहतर शिक्षा के साथ साथ बेहतर संस्कार होना भी जरूरी है। यह दोनों ही एक सिक्के के दो पहलू हैं।
बगैर अच्छे संस्कार के हासिल की गई शिक्षा सिर्फ काटों भरा ताज है। उन्होंने कहा कि हम सभी की जिम्मेदारी है कि अपने बच्चों को संस्कारयुक्त शिक्षा दिलाएं। विशेष तौर पर बालिका शिक्षा पर अधिक जोर दें। प्रधानाध्यापक मसूदुल हसन ने कहा कि शिक्षा के बगैर इंसान कुछ भी नहीं होता है। सभी धर्म में कहा गया है कि शिक्षा पर जोर देना चाहिए। इस दौरान महफूज आलम, हाफिज अबू बकर, रजिया सुल्तान, मोईनुद्दीन, फारूक अहमद, मोहम्मद अमीन, फिरोज अहमद आदि मौजूद रहे।