आलापुर (अंबेडकरनगर)। त्रयोदशी से लेकर पूर्णिमा तक तीन दिन पवित्र तीर्थ नदियों में स्नान करने से समस्त माघ माह में स्नान करने का फल प्राप्त होता है। यह जानकारी सनातन वैदिक आश्रम देवभूमि नयागांव से जुड़े पं आशुतोष शुक्ला ने दी। उन्होंने बताया कि शास्त्रों की ऐसी मान्यता है कि माघी पूर्णिमा के तीन दिन पहले से पवित्र तीर्थ नदियों में स्नान करने से पूरे माघ माह स्नान करने का फल प्राप्त होता है। शास्त्रों में वैसे तो सभी पूर्णिमाओं का विशेष महत्व है, लेकिन माघ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा विशेष फलदायी माना गया है। इस बार यह शुभ तिथि 16 फरवरी दिन बुधवार को है।
ऐसी मान्यता है कि माघ मास में भगवान विष्णु जल में निवास करते हैं। इसलिए माघी पूर्णिमा के दिन नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा व कथा श्रवण करने की परंपरा है। शास्त्रों में माघ की पूर्णिमा को भाग्यशाली तिथि बताया गया है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में घर की साफ सफाई करके पूरे घर में गंगाजल से छिड़काव करना फलदायी होता है। श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण लगाएं और फिर घर की दहलीज पर हल्दी व कुमकुम लगाएं। इसके बाद मुख्य द्वार के दोनों ओर स्वास्तिक का चिह्न बना कर रोली अक्षत लगाएं। दरवाजे पर घी का दीपक जलाकर प्रणाम करें। इसके बाद तुलसी की पूजा करनी चाहिए। उनको जल, दीपक और भोग अर्पित करें ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
माघी पूर्णिमा के दिन दान का विशेष महत्व बताया गया है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इस दिन गरीब व जरूरतमंद व्यक्ति को तिल, घी, कंबल, फल आदि वस्तुओं का दान करें। इसके साथ ही पूजा घर में घी का दीपक जलाएं और उसमें चार लौंग रख दें। ऐसा करने से धनधान्य की कभी कमी नहीं रहती। माघ की पूर्णिमा के दिन भगवद्गीता, विष्णु सहस्त्रनाम या फिर गजेंद्र मोक्ष का पाठ करें। पुराणों में पूर्णिमा के दिन इन तीनों का पाठ करना बहुत ही महत्वपूर्ण बताया गया है। ऐसा करने से सभी संकट दूर होते हैं और आपस में सकारात्मक भाव उत्पन्न होता है। भगवान कृष्ण के प्रिय तिथि माघी पूर्णिमा के दिन भगवान श्रीकृष्ण को और चंद्रमा को सफेद फूल अर्पित करें। इसके साथ ही सफेद मोती, सफेद वस्त्र, सफेद मीठा अर्पित करें। ऐसा करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है।