अंबेडकरनगर। जिले में संचालित 344 मदरसों में तैनात एक हजार से अधिक शिक्षकों की बकरीद फीकी रहेगी। दरअसल बीते दिनों जिले में पहुंचे तीन माह के अंशदान का भुगतान जहां पर्व से पहले नहीं हो सका है, तो वहीं साढ़े पांच वर्ष से मानदेय का भी भुगतान नहीं हुआ है। नतीजा यह है कि आर्थिक संकट से जूझ रहे शिक्षकों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यदि जिले में पहुंचे अंशदान का ही भुगतान कर दिया गया होता, तो भी पर्व को उल्लास के साथ मना लेते, लेकिन ऐसा हो नहीं सका।
मदरसा शिक्षकों की आर्थिक समस्याएं दूर नहीं हो पा रही हैं। आलम यह है कि बीते साढ़े पांच वर्ष से मानदेय का भुगतान नहीं हो सका है। मुश्किल यहीं तक सीमित नहीं है। बीते लगभग एक पखवाड़े से जिले में तीन माह का अंशदान नौ हजार रुपये शासन से आया है, लेकिन उसका भुगतान भी नहीं हो सका है। जिले में 344 मदरसे संचालित हैं। इसमें 1062 शिक्षक बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि घर का खर्च चलाना मुश्किल है। तमाम मशक्कत के बीच परिवार का पोषण कर पा रहे हैं। ऐसे में पर्व की खुशियां कैसे मना सकेंगे।
मॉडर्न मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद जमाल अहमद अंसारी ने कहा कि साढ़े पांच वर्ष का मानदेय तो रुका ही है, उस पर से जो अंशदान जिले में पहुंचा है, उसका भी भुगतान नहीं किया गया। यदि जिले में पहुंचे तीन माह का नौ हजार रुपये अंशदान का ही भुगतान हो गया होता, तो शिक्षकों के घर में पर्व की खुशियां मनाई जा सकती थीं। जिलाध्यक्ष महफूज आलम ने कहा कि अंशदान का भुगतान किए जाने को लेकर कई बार जिम्मेदारों से शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई।