अंबेडकरनगर। सामाजिक, आर्थिक एवं जातिगत जनगणना का कार्य जिले में पूरी तरह लापरवाही की भेंट चढ़ता जा रहा है। कार्य के प्रति विभागीय अधिकारी कितना गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ग्रामीण क्षेत्रों की जनगणना जुलाई से प्रारंभ होने के बाद भी अभी तक पूर्ण नहीं हो सकी है। जनगणना में सबसे बड़ी बाधा खराब पड़े पीसी टैबलेट बन रहे हैं। जनगणना कार्य के लिए आए 778 पीसी टैबलेटों में 390 खराब पड़े हैं। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों के कुल 4422 प्रगणक खंडों में से मात्र 2981 प्रगणक खंडों की जनगणना ही हो सकी है। ग्रामीण क्षेत्रों की जनगणना का कार्य पूरा न होने के चलते शहरी क्षेत्रों की जनगणना का कार्य अभी तक प्रारंभ ही नहीं हो सका है। सामाजिक आर्थिक एवं जातिगत जनगणना का कार्य तमाम उठापटक के बीच जुलाई माह में प्रारंभ हुआ था। जनगणना कार्य के लिए ग्रामीण क्षेत्रों को 4422 प्रगणक खंडों में बांटा गया। इसमें 1109 प्रगणक व 1109 डाटा इंट्री ऑपरेटर लगाए गए। साथ ही इसके लिए 778 पीसी टैबलेट दिए गए। हालांकि जनगणना का कार्य प्रारंभ से ही संबंधित कर्मचारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ गई। जिन 778 पीसी टैबलेट को कार्य में लगाया गया था, उसमें से 390 पीसी टैबलेट खराब प्रारंभ में ही खराब हो गए। मात्र 388 पीसी टैबलेट के ही सहारे जनगणना का कार्य किया जा रहा है। खराब पड़े पीसी टैबलेट को ठीक कराने की मांग लगातार की जा रही है, लेकिन इस तरफ कोई सार्थक कदम नहीं उठाया जा सका।
विभागीय अधिकारियों एवं जनगणना के कार्य में लगे कर्मचारियों की लापरवाही का ही कारण है कि पांच माह बीत गए, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की जनगणना का कार्य पूर्ण नहीं हो सका है। अभी तक 4422 प्रगणक खंडों के सापेक्ष अब तक मात्र 2981 प्रगणक खंडों की ही जनगणना हो सकी है। जिन प्रगणकों में जनगणना का कार्य पूर्ण हुआ है, उसमें भी तमाम शिकायतें सामने आई हैं। कई ग्रामीणों ने प्रगणकों एवं डाटा इंट्री ऑपरेटरों पर किसी एक ही स्थान पर बैठकर जनगणना का कार्य पूरा किए जाने की शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीण क्षेत्रों की जनगणना पूर्ण न होने के चलते ही 506 प्रगणक खंडों में बंटे शहरी क्षेत्रों की जनगणना का कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है।