अंबेडकरनगर। धान खरीद को लेकर जिले की सरकारी एजेंसियां हाथ पर हाथ धरे बैठी हैं। किसान भले ही अपनी उपज लेकर दर-दर भटक रहा हो, लेकिन एजेंसियों पर इसका असर नहीं पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि अधिकतर धान क्रय केंद्रों पर खरीद नहीं की जा रही है। कहीं केंद्रों पर ताले लटके रहते हैं तो कहीं कांटा और बोरा ही नहीं हैं। डीएम निधि केसरवानी की सख्त चेतावनी के बाद भी अधिकारी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। विभागीय अधिकारियों की ढिलाई के चलते जिले को मिले 75 हजार 300 मीट्रिक टन खरीद के सापेक्ष अब तक मात्र 210.22 मीट्रिक टन धान की खरीद हो सकी है। किसानों के धान की खरीद का कार्य जिले में एक अक्तूबर से शुरू है। लगभग डेढ़ माह का समय बीत गया, परंतु अभी तक जिले में धान क्रय के लिए स्थापित अधिकांश क्रय केंद्रों पर कांटा, बोरा ही उपलब्ध नहीं हो सका है। किसानों का कहना है कि क्षेत्र में खोले गए धान क्रय केंद्रों पर अक्सर ताले ही लटके रहते हैं। ऐसे में किसानों को मजबूरन आढ़तियों के हाथों धान बेचना पड़ रहा है। शनिवार को ‘अमर उजाला’ ने मरथुआ सरैया के यूपी एग्रो केंद्र का निरीक्षण किया तो यहां केंद्र बंद मिला। यहां पर कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार जनपद को इस बार 75 हजार 300 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य दिया गया है। इसके लिए पांच एजेंसियों के 53 केंद्रों को अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें खाद्य विभाग के 10 केंद्र को 40 हजार मीट्रिक टन, पीसीएफ के 30 क्रय केंद्रों को 25 हजार मीट्रिक टन, यूपी एग्रो के तीन क्रय केंद्रों को 4300 मीट्रिक टन, यूपीएसएस के 7 क्रय केंद्रों को 3 हजार मीट्रिक टन, कर्मचारी कल्याण निगम के 3 क्रय केंद्रों को 300 मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया था। डेढ़ माह बीतने के बाद भी खाद्य विभाग द्वारा लक्ष्य के सापेक्ष महज 139.82 मीट्रिक टन, पीसीएफ द्वारा 4.80 मीट्रिक टन, यूपी एग्रो द्वारा 24 मीट्रिक टन, यूपीएसएस द्वारा 16.60 मीट्रिक टन व कर्मचारी कल्याण निगम द्वारा 25 मीट्रिक टन धान की खरीद की गयी है। यह आंकडे विभाग द्वारा की जा रही मनमानी बयां करने के लिए पर्याप्त हैं। उधर, एडीएम रामाश्रय ने कहा कि धान खरीद को लेकर लगातार सक्रियता बरती जा रही है। लापरवाही को संज्ञान में लिया जाएगा।