अंबेडकरनगर। भीषण गर्मी के बीच बिजली आपूर्ति की बदहाली ने संकट और बढ़ा दिया है। एक तरफ जहां अघोषित कटौती से निजात नहीं मिल रही, वहीं लो वोल्टेज से त्राहि-त्राहि मची हुयी है। शहरी क्षेत्र में जहां बमुश्किल 15 से 16 घंटे की बिजली मिल पा रही, वहीं ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को औसतन दस घंटे ही आपूर्ति मिल पा रही है। ट्रांसफार्मरों के लगातार जलने व जवाब देने से ग्रामीण क्षेत्रों की विद्युत आपूर्ति छिन्न-भिन्न चल रही है। मंगलवार शाम से लेकर बुधवार शाम तक अलग-अलग क्षमता के कुल 23 ट्रांसफार्मर जल गये। इससे लगभग 50 हजार की आबादी की विद्युत आपूर्ति ठप पड़ गयी है।
भीषण गर्मी व उमस के बीच विद्युत आपूर्ति जिले में बेपटरी हो गयी है। हालांकि रिकॉर्ड कटौती सेे तो कुछ हद तक छुटकारा मिला है, लेकिन इन दिनों गर्मी व उमस बढ़ने से नागरिकों की मुश्किल और ज्यादा व्यापक हो चली है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक उपभोक्ताओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अघोषित कटौती का दौर मंगलवार से लेकर बुधवार तक जारी रहा। जिला मुख्यालय के अलग-अलग क्षेत्रों में ही मंगलवार शाम से लेकर देर रात तक आपूर्ति में व्यवधान होता रहा। यह सिलसिला बुधवार को भी चलता रहा। नतीजा यह हुआ कि उपभोक्ताओं को सर्वाधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
अकबरपुर नगर के अलावा विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में भी पिछले दो दिन से आपूर्ति में व्यवधान बढ़ गया है। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। हालत यह है कि जिला मुख्यालय पर 15 घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बमुश्किल 10 घंटे की बिजली मिल पायी है। इससे कई क्षेत्रों में उपभोक्ता पूरी रात करवट बदलने को विवश रहे। उधर अकबरपुर के गौहन्ना तथा जलालपुर के रूढ़ा समेत भीटी, कटेहरी, महरुआ, टांडा, आलापुर, बसखारी व जहांगीरगंज आदि क्षेत्र में कुल 23 ट्रांसफार्मर 24 घंटे के भीतर जल गये। इससे लगभग 50 हजार की आबादी को मंगलवार रात अंधेरे में गुजारना पड़ा। ट्रांसफार्मर बदलवाने के लिए उपभोक्ता संबंधित विद्युत उपकेंद्रों से लेकर अधिशाषी अभियंता के कार्यालय तक चक्कर लगाते देखे गये। उपभोक्ताओं ने ऐसे सभी ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्घि किये जाने की मांग की है।
बदले जाएं जर्जर उपकरण
टाउन फीडर के उपभोक्ता सुनील शर्मा व मोतीलाल ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि भीषण गर्मी में बदतर विद्युत आपूर्ति ने बड़ी समस्या खड़ी कर दी है। सुचारु बिजली मिलने में सबसे बड़े बाधक जर्जर हो चुके उपकरण हैं। तमाम उपकरण तो ऐसे हैं, जो कई दशक पुराने हैं। ऐसे में यदि हल्की सी भी हवा चलती है, तो कई पोलों के इंसुलेटर व तार जवाब दे जाते हैं। अंगद कुमार व मनोज जायसवाल ने कहा कि जब तक जर्जर हो चुके उपकरणों को बदला नहीं जाएगा, तब तक सुचारु बिजली नहीं उपलब्ध होगी। ऐसे में पॉवर कॉर्पोरेशन के जिम्मेदारों को चाहिए कि वे पहले जर्जर हो चुके उपकरणों को बदलवाने का कार्य करें।
नहीं तय है विद्युत आपूर्ति का रोस्टर
अशरफपुर बरवां में नया विद्युत उपकेंद्र स्थापित कर संचालन प्रारंभ कर दिया गया, लेकिन अब तक रोस्टर तक तय नहीं हो सका है। इससे इस उपकेंद्र से जुड़े मरथुआ सरैया, टीकमपारा, बट्टूगढ़, शाहपुर परासी, आनंदनगर, यरकी, रतनपुर, भरथुआ समेत कई अन्य गांवों की लगभग 20 हजार की आबादी को भीषण गर्मी में विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ता अंकित व सुशील ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि विद्युत आपूर्ति का कोई रोस्टर ही नहीं तय है। जब जरूरत होती है, तो बिजली नदारद हो जाती है। ऐसे में इस भीषण गर्मी में विभिन्न प्रकार की समस्या उत्पन्न हो रही है। राजितराम व अंकेश ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि एक तो रोस्टर के अनुसार बिजली नहीं मिल रही, उस पर से जो बिजली मिलती है, उसमें भी समय-समय पर ट्रिपिंग होती रहती है। इससे समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। कहा कि शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक विद्युत आपूर्ति की जाए। जेई रामअचल गुप्ता ने कहा कि ऊपर से 18 घंटे बिजली दिए जाने का रोस्टर है। यह तय नहीं है कि कब कब बिजली दी जाए। 18 घंटे बिजली दी जा रही है।
सुचारु हो रही बिजली आपूर्ति
जो बिजली मिल रही है, उसे सुचारु रूप से उपभोक्ताओं का तक पहुंचाया जा रहा है। यदि कहीं भी किसी भी प्रकार की गड़बड़ी होती है, तो उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर की जाती है। -वीके पटेल, अधिशाषी अभियंता विद्युत