माया राज में बनवाए गए स्मारकों में वह दिन दूर नहीं जब शहनाई बजते हुए सुनाई दे और महफिल जमते हुए दिखाई दे।
यही नहीं, किसी विशेष अतिथि को यदि इन स्मारकों में बने प्रशासनिक भवन और वेटिंग रूम को यदि गेस्ट हाउस या फिर मकान के रूप में आवंटित कर दिया जाए, तो भी चौंकने की जरूरत नहीं है।
जिलाधिकारी की रिपोर्ट पर मुख्य सचिव जावेद उस्मानी की अध्यक्षता में सहमति बन गई है। इस संबंध में कार्यवृत्त जारी कर दिया गया है। रही बात विधिवत आदेश जारी करने की तो वह भी शीघ्र ही जारी करने की तैयारी है।
माया सरकार में दलित महापुरुषों के नाम पर स्मारक और पार्क बनवाए गए। इसे बनवाने में सरकारी खजाने का मुंह खोल दिया गया। पार्कों व स्मारकों को विशेष प्रोजेक्ट माना गया और इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान भी किया गया।
माया सरकार जाने के बाद से ही इन स्मारकों और पार्कों के औचित्य पर सवाल उठा। अखिलेश सरकार ने इनके वैकल्पिक इस्तेमाल के लिए लखनऊ के जिलाधिकारी अनुराग यादव की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर रिपोर्ट देने को कहा। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दे दी है।
आवास विभाग ने इस रिपोर्ट को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में रखा, जिस पर स्मारकों की देखरेख करने वाले विभागों के प्रमुख सचिवों से विचार-विमर्श के बाद इसके वैकल्पिक इस्तेमाल पर सहमति बनी है।
इसमें यह भी तय किया गया है कि वैकल्पिक इस्तेमाल के लिए यदि जरूरत पड़ी तो इसके लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण भू-उपयोग भी परिवर्तित करेगा। पर स्मारकों और पार्कों का स्वामित्व स्मारक समिति के पास ही रहेगा।
कहां क्या
= रमाबाई अंबेडकर मैदान की खाली जमीन पर होगी शादी और सांस्कृतिक कार्यक्रम
= रमाबाई अंबेडकर मैदान में लगेगा लखनऊ महोत्सव और खुलेगा लघु उद्योग का एक्सपो मार्ट
= डारमेट्री, रैन बसेरा का भू-उपयोग बदल कर होगा व्यावसायिक इस्तेमाल
= मैदान के पी-4 पार्किंग स्थल में बनेगा अंतर्राज्यीय बस टर्मिनल
= बौद्ध विहार शांति उपवन के नौ मकानों को राज्य सपंत्ति विभाग करेगा आवंटित
= प्रशासनिक भवन को सरकारी विभागों को किया जाएगा आवंटित
= कांशीराम स्मारक प्रशासनिक भवन में खुलेगा सरकारी कार्यालय
= कांशीराम ईको गार्डन कैंटीन तीन साल के लिए निजी क्षेत्र को दिया जाएगा
= स्टाफ क्वार्टर व डोरमैट्री का राज्य संपत्ति विभाग करेगा इस्तेमाल
= डा. भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल में खुलेगा एनआरएचएम या उदफोटो