रोजगार की मांग को लेकर प्रदर्शन करते संयुक्त युवा मंच के कार्यकर्ता।
- फोटो : अमर उजाला।
केंद्र सरकार रोजगार के प्रति गंभीर नहीं
राष्ट्रपति को प्रेषित ज्ञापन में कहा गया कि बेरोजगारी की समस्या चिंताजनक स्तर पर है, लेकिन केंद्र सरकार इसके हल के लिए कतई गंभीर नहीं है। रोजगार अधिकार कानून बनाने, देश में एक करोड़ रिक्त पदों विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में छह लाख रिक्त पदों को तत्काल भरने, सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग व संविदा व्यवस्था खत्म करने, रेलवे-बैकिंग, शिक्षा-स्वास्थ्य, बिजली-कोयला जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निजीकरण पर रोक और रोजगार सृजन के लिए कारपोरेट्स पर संपत्ति व उत्तराधिकार कर लगाने जैसे मुद्दों को उठाया गया।
मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा गया।
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छह लाख रिक्त पद भरने के चुनावी घोषणा पर हो अमल
मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में छह लाख रिक्त पदों को भरने की चुनावी घोषणा को अमल में लाने की मांग की गई। साथ ही शिक्षा सेवा चयन आयोग का तत्काल गठन करने, टीजीटी पीजीटी विज्ञापन 2022 में रिक्त 25 हजार सहित तदर्थ के पदों को शामिल करने का मुद्दा उठाया गया। टीजीटी -पीजीटी व असिस्टेंट प्रोफेसर समेत सभी की परीक्षा तिथि घोषित करने और एलटी व प्रवक्ता (जीआईसी), प्राथमिक विद्यालयों, पुलिस, तकनीकी संवर्ग समेत अन्य भर्तियों के सभी रिक्त पदों को तत्काल विज्ञापित करने की मांग की गई।
सामूहिक उपवास में संयुक्त युवा मोर्चा के केंद्रीय टीम सदस्य राजेश सचान, युवा मंच अध्यक्ष अनिल सिंह, ई. राम बहादुर पटेल, इविवि के छात्र नेता अमित द्विवेदी आजाद, पीएमसी सदस्य शीतला प्रसाद ओझा, साधना पटेल, रावेन्द्र कुमार, संजय कुमार चौरसिया, हनुमान प्रसाद चौरसिया, डॉ विनोद कुमार, सुरेंद्र कुमार, धर्मेंद्र पटेल, विजय मोहन पाल, बृजेश पटेल, दीपक चौधरी, रमाशंकर सरोज, विनोवर शर्मा, प्रेम चंद्र पटेल समेत सैकड़ों युवा शामिल रहे।