मेला प्रशासन ने क्रियायोग के शिविर के लिए नागवासुकि के पास भूमि आवंटित करने के लिए कहा है। मेला प्रशासन का यह प्रस्ताव संतों को मंजूर नहीं है। संस्थापक क्रियायोग गुरु स्वामी योगी सत्यम ने आहत होकर शिविर लगाने से इन्कार कर दिया है। इससे अमेरिका, कनाडा, सिंगापुर, आस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, मोरोक्को, साउथ कोरिया,जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम समेत दुनिया के 10 से अधिक देशों के सौ से अधिक अनुयायी माघ मेले में प्रवास नहीं कर सकेंगे।
इन देशों से 15 से अधिक विदेशी श्रद्धालु यहां आ चुके हैं, लेकिन अब वह भूमि आवंटन विवाद के बाद निराश हैं। यह पहला मौका नहीं है, जब क्रियायोग के लिए भूमि निर्धारित स्थल पर न मिलने की वजह से विवाद हुआ है। इससे पहले भी क्रियायोग आश्रम को मेले में विस्थापन की मार झेलनी पड़ी थी, लेकिन तब कोर्ट से उन्हें राहत मिल गई थी।
त्रिवेणी मार्ग पर कटान की वजह से क्रियायोग आश्रम के शिविर की भूमि इस बार तलहटी का हिस्सा बन गई है। ऐसे में क्रियायोग के अनुयायी बिना प्रशासन की अनुमति के ही स्वामी वासुदेवानंद के शिविर स्थल पर अपना सामान गिरने लगे थे। इसलिए उन्हें समझा-बुझाकर अन्यत्र शिविर लगाने के लिए कहा गया है। - दयानंद प्रसाद, प्रभारी माघ मेलाधिकारी।
मेला प्रशासन अन्याय कर रहा है। त्रिवेणी मार्ग पर उनका शिविर माघ मेले की शोभा बना करता है। सैकड़ों विदेशी भक्त वहां क्रियायोग के लिए कल्पवास करते हैं और भारतीय संस्कृति का अनुसरण और अनुभव लेकर जाते हैं, लेकिन मेला प्रशासन के रवैये से सभी आहत हैं। अगर त्रिवेेणी मार्ग पर उनको भूमि प्रदान नहीं की जाती तो वह शिविर लगाने नहीं आएंगे। - स्वामी योगी सत्यम, संस्थापक- क्रियायोग आश्रम एवं अनुसंधान संस्थान।
भूमि आवंटन विवाद कोर्ट में ले जाने की तैयारी
क्रियायोग के भूमि आवंटन के विवाद को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी है। आश्रम के संतों का कहना है कि नदी प्रबंधन के मानकों के अनुसार गंगा प्रत्येक वर्ष धारा बदलती है। जहां से तट शुरू होता है, वहीं से भूमि का सीमांकन भी माना जाना चाहिए। भूमि कटान में चली गई, यह कहना अनुचित और छलावा है।