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गजब : एनसीजेडसीसी ने खुसरो मिर्जा की जगह अमीर खुसरो के मकबरे पर करा दी कव्वाली

Fri, 01 Jul 2022 12:52 AM IST
विनोद सिंह अनूप ओझा, प्रयागराज

सार

सूफी साहित्य के पुरोधा अमीर खुसरो की शान में दो दिवसीय कव्वाली शान-ए-खुसरो के तहत शुक्रवार को कव्वाली गायन की आखिरी शाम थी। श्रोताओं की नजर जब यहां टंगे बैनर पर गई तो वे हैरान रह गए।
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Prayagraj News : अमर खुसरो। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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सात राज्यों की सांस्कृतिक-परंपरा और लोक शैलियों के संरक्षण-संवर्धन का दारोमदार जिस उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) को सौंपा गया है, उसे अमीर खुसरो और मुगल शहजादे खुसरो मिर्जा के बीच फर्क ही पता नहीं है। कमाल की बात यह हुई कि आजादी के अमृत महोत्सव के तहत खुल्दाबाद के खुसरो बाग में कव्वाली मुकाबला अमीर खुसरो का मकबरा लिखकर प्रचारित किया गया, जबकि सूफी संत अमीर खुसरो का मकबरा प्रयागराज में है ही नहीं। उनके नाम पर किसी बाग की स्थापना भी नहीं हुई। जिस मकबरे को अमीर खुसरो का बताया गया है, वह मुगल शहजादे खुसरो मिर्जा का है।

 

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सूफी साहित्य के पुरोधा अमीर खुसरो की शान में दो दिवसीय कव्वाली शान-ए-खुसरो के तहत शुक्रवार को कव्वाली गायन की आखिरी शाम थी। श्रोताओं की नजर जब यहां टंगे बैनर पर गई तो वे हैरान रह गए। इससे पहले एनसीजेडसीसी ने संस्कृति मंत्रालय समेत अन्य अतिथियों को अमीर खुसरो के मकबरे में आयोजन का न्योता ही भेजा था। इस संबंध में एनसीजेडसीसी के निदेशक प्रो. सुरेश शर्मा से संपर्क साधा गया ,लेकिन वह टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं हुए।

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कौन थे अमीर खुसरो
अबुल हसन यमीनुद्दीन अमीर ख़ुसरो 14वीं सदी के प्रमुख कवि, शायर, गायक और संगीतकार थे। कव्वाली और सितार इन्हीं की देन मानते हैं। अमीर खुसरो प्रथम मुस्लिम कवि थे, जिन्होंने हिंदी शब्दों का खुलकर प्रयोग किया। वे सन् 1253 ई. में एटा के पटियाली नामक कस्बे में जन्मे थे। 
 

जहांगीर के बड़े पुत्र थे खुसरो मिर्जा
खुसरो बाग में चार मकबरे हैं। पहला मकबरा जहांगीर की पहली पत्नी मानबाई उर्फ शाह बेगम के बड़े पुत्र खुसरो मिर्जा का है। पिता से विद्रोह करने के बाद इसी बाग में नजरबंद खुसरो भागने के प्रयास में मारा गया था। दूसरा मकबरा शाह बेगम, तीसरा खुसरो की बहन निसार बेगम का और चौथा तमोलन बीबी का है। 1605 में अकबर के इंतकाल के बाद उसके पुत्र सलीम उर्फ  जहांगीर ने खुसरो बाग का निर्माण कराया था।


अमीर खुसरो का मकबरा प्रयागराज में नहीं है। एनसीजेडसीसी ने कव्वाली मुकाबले के आयोजन स्थल में अमीर खुसरो के मकबरा का गलत उल्लेख किया है। यह आयोजन खुसरो मिर्जा के मकबरे पर हुआ। - गुलाम सरवर, प्रभारी क्षेत्रीय संस्कृति अधिकारी/पांडुलिपि अधिकारी।
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