तीर्थपुरोहितों ने कहा, अशोक सिंहल हमारे प्रेरणास्रोत
अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासंघ एवं धर्म यात्रा महासंघ के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को अशोक सिंहल की छठी पुण्यतिथि मनाई गई। इस मौके पर संगम क्षेत्र में तीर्थयात्रियों के बीच प्रसाद वितरण के बाद प्रदेश महामंत्री अमित आलोक पांडे ने कहा, अशोक सिंहल हमारे प्रेरणास्रोत हैं। उन्हीं के दिशानिर्देशों पर चलाए गए अभियान और आंदोलनों की वजह से ही आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण संभव हो पाया है। वह आजीवन एक संत की तरह सादगीपूर्ण जीवन जीते हुए मार्गदर्शन करते रहे। कार्यक्रम में जय बहादुर सिंह, शेरसिंह शर्मा, सुरेंद्र यादव,श्यामबाबू पटेल, नरेंद्र पांडे,वीरेंद्र तिवारी, सुदामा तिवारी, राहुल निषाद आदि मौजूद थे।
देश के लोक जीवन में जो चुप्पी वही भारतीय जीवन
लोक जीवन में भारतीय चेतना में लोक को छोड़ दिया जाय तो हमने जो शहर गढ़े हैं, उनकी भारतीय चेतना विलुप्त हो गई है। लोक से भारत के तथाकथित प्रबुद्ध जन यही समझते हैं कि वह ग्रामीण, पिछड़ा है और उसको मुख्यधारा में लाना है। लेकिन सवाल ये हैं कि यह मुख्यधारा किसने तय की है। क्या अमेरिका, यूरोप ने यह मुख्यधारा तय की? बुधवार को यह बातें पद्म श्री सम्मान से सम्मानित डा. कपिल तिवारी से विहिप के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे स्वर्गीय अशोक सिंहल की पुण्यतिथि पर आयोजित व्याख्यान में कही।
स्वर्गीय अशोक सिंहल के आवास महावीर भवन में स्थापित अरुंधती वशिष्ठ अनुसंधान पीठ की ओर से ‘लोक जीवन में भारतीय चेतना’ विषयक व्याख्यान में डा. कपिल तिवारी ने कहा कि भारत के लोक जीवन में जो चुप्पी है वही भारतीय जीवन है। भारतीय जीवन की चुप्पी शांत तरीके से चेतना को जीवित किए है। आज की जो आधुनिकता है वह औपनिवेशिक काल से विकसित हुई। भारत वास्तव में सनातन है। जिस क्षण हम अपनी परंपरा भूल गये समझ लो अपनी मां को भूल गये। परंपरा मां की तरह है।
उसी ने उंगली पकड़कर चलना सिखाया। उंगली पकड़कर हमने ऐसी दौड़ लगाई और लौटकर नहीं देखा। मां कहां हैं, भाषा कहां हैं। लेकिन अब भारत की चेतना में सदियों बाद परिवर्तन हो रहा है। हम विदेशियों की नहीं बल्कि अपनी आंखों से परंपराओं को देखना शुरू कर रहे हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने की।
इस दौरान अरुंधती पीठ के राष्ट्रीय संयोजक डा. चंद्र प्रकाश ने कहा कि स्वर्गीय सिंहल का जन्म भले ही आगरा में हुआ हो लेकिन प्रयागराज उनकी कर्मभूमि थी। उनका व्यक्तित्व बहुआयामी था। इस अवसर पर देश के पूर्व अतिरिक्त महान्यायवादी अशोक मेहता, पूर्व कैबिनेट मंत्री डा. नरेंद्र कुमार सिंह गौर, डा. हरिवंश दीक्षित, प्रो. रामेंद्र सिंह, कृष्ण चंद्र, विमल प्रकाश, सुरेश अग्रवाल, मनीष गोयल, आशुतोष श्रीवास्तव, अजीत, मनीष कुमार आदि मौजूद रहे।