पत्नी ने कहा, भविष्य में वह पति से कोई गुजारा भत्ता नहीं मांगेगी। बेटा बालिग होने तक मां के साथ रहेगा और पिता को बेटे से नियत समय पर मुलाकात करने की अनुमति होगी। 20 अगस्त 2007 को तलाक होने के बाद दोनों अलग रह रहे हैं।
पत्नी ने बेटे की ओर से गौतमबुद्धनगर परिवार अदालत में गुजारा भत्ता दिलाने के लिए धारा 125 में अर्जी दायर की। अदालत ने बेटे को 15 हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया। फिर पत्नी ने भी धारा 125 में पूर्व पति की आय में 25 फीसदी गुजारा भत्ते की मांग की। साथ ही 50 हजार रुपये अंतरिम गुजारे की अर्जी दी।
इसे स्वीकार करते हुए परिवार अदालत ने पत्नी को 25 हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता पाने का हकदार माना। पति ने इसकी वैधता को चुनौती दी कि पत्नी ने सारे अधिकार छोड़ दिए हैं। इसलिए यह आदेश रद्द किया जाय। कोर्ट ने कहा, परिवार अदालत ने गलती की है और पत्नी को 25 हजार अंतरिम गुजारा भत्ता देने के आदेश को रद्द कर दिया।