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यौन शोषण मामला : पीड़ित बालक 12 दिनों से गायब, आखिर किससे हुई पूछताछ, जांच रिपोर्ट पर उठे सवाल

Sat, 24 Sep 2022 10:18 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

राजरूपपुर बाल गृह में रहने वाले पीड़ित बालक को 18 अगस्त को घर भेज दिया गया था। उसी दिन बालक की मां ने बाल कल्याण समिति के सामने यौन शोषण की शिकायत की थी। महिला ने कई अन्य गंभीर आरोप भी लगाए थे।
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child demo, child crime, child - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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राजरूपपुर स्थित बाल गृह में यौन शोषण के मामले में डीएम की ओर से गठित मजिस्ट्रेट तथा जिला प्रोबेशन अधिकारी (डीपीओ) की जांच रिपोर्ट पर ही सवाल उठने लगे हैं। दोनों ही जांच में पीड़ित बालक तथा यौन शोषण की शिकायत करने वाली मां के बयान नहीं लिए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह भी है कि पीड़ित बालक 12 दिनों से गायब है और दोनों जांच समितियों ने बिना उनका पक्ष जाने एक दिन में रिपोर्ट सौंप दी।

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राजरूपपुर बाल गृह में रहने वाले पीड़ित बालक को 18 अगस्त को घर भेज दिया गया था। उसी दिन बालक की मां ने बाल कल्याण समिति के सामने यौन शोषण की शिकायत की थी। महिला ने कई अन्य गंभीर आरोप भी लगाए थे। बाल कल्याण समिति की ओर इस बाबत रिपोर्ट जिला प्रोबेशन के माध्यम से डीएम को सौंपी गई थी। हालांकि, दोनों अफसर आखिरी समय तक इस तरह की किसी रिपोर्ट से इंकार करते रहे।

जांच समिति ने यौन उत्पीड़न के आरोपों को किया था खारिज
इस बाबत अखबारों में खबर छपने के बाद डीएम ने शुक्रवार को मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में दो सदस्यीय कमेटी गठित कर दी। इसी क्रम में डीपीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी ने भी जांच की। दोनों ही कमेटियों ने शुक्रवार को जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी। इसमें यौन शोषण के आरोपों को खारिज कर दिया गया। खास यह कि  दोनों टीम ने पीड़ित पक्ष से बात किए बगैर ही जांच पूरी कर ली। पीड़ित की मां का कहना है कि बेटे के साथ बाल गृह में गलत काम किया जाता रहा। उन्होंने बच्चों का खून निकाले जाने की बात भी कही।


महिला का कहना है कि उन्होंने बाल कल्याण समिति में शिकायत की थी लेकिन उनसे पूछने के लिए कोई भी अफसर अब तक नहीं आया। बेटा 12 दिनों से गायब है। वह घर से भाग गया है। उसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। इस तरह से पीड़ित बालक और उसकी मां से बात किए बगैर ही जांच रिपोर्ट सौंपे जाने पर सवाल खड़े हो गए हैं।

डीपीओ ने सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष की मंशा पर उठाए सवाल
जब 18 अगस्त को शिकायत मिली तभी सीडब्ल्यूसी द्वारा डीएम के संज्ञान में प्रकरण क्यों नहीं लाया गया? सीडीडब्ल्यूसी द्वारा तत्काल बच्चे का मेडिकल क्यों नहीं कराया गया? जबकि, सीडब्ल्यूसी को मेडिकल कराने का पावर है। बालक 12 दिनों से गायब है तो क्या थाने में गुमसूदगी की रिपोर्ट दर्ज है? यह सब सीडब्ल्यूसी द्वारा मनगढ़ंत कहानी है। दरअसल, सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष अपना बालगृह चलाना चाहते हैं। इसलिए उसकी मां को बुलाकर ये सब कहानी सिखाई गई है और वो अनावश्यक इसको मुद्दा बना रहे हैं। महिला बालक की सौतेली मां है। वह बालक को प्रताड़ित करती थी। उसने बालक के खिलाफ खुल्दाबाद थाने में अपहरण का मुकदमा लिखाया था।
 

एक साल से बांधे जाने की वजह से उसके पैर कमजोर हो गए थे। इसकी वजह से किशोर न्यायालय ने सीडब्ल्यूसी को बच्चे को बालगृह में आवासित करने का आदेश दिया था। इसके बाद से बालक बालगृह आवासित था। जब बालक बालगृह से 18 अगस्त को ही चला गया तो उससे कैसे पूछताछ की जाए। इसके अलावा मां सौतेली है और वह खुद बालक को प्रताड़ित करती है। इसलिए उससे पूछताछ नहीं की गई। बालगृह में रहने वाले सभी 26 बच्चों के बयान दर्ज किए गए। किसी ने भी यौन शोषण की बात नहीं की। 
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दोनों जांच रिपोर्ट मिली है। इन्हीं के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पीड़ित बालक तथा मांग से पूछताछ हुई या नहीं इस बारे में अभी कुछ नहीं कह सकता। यदि जांच का कोई पहलू रह गया है तो उसे देखा जाएगा। - संजय कुमार खत्री, डीएम


सीडब्ल्यूसी को हटाने के लिए लिखा गया पत्र
सीडब्ल्यू अध्यक्ष को हटाने के लिए सचिव महिला कल्याण को पत्र लिखा गया है। डीपीओ पंकज कुमार मिश्र का कहना है कि सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष की उदासीनता के लिए डीएम ने सचिव को यह पत्र प्रेषित किया है। हालांकि, डीएम का कहना है कि उन्होंने इस तरह का कोई पत्र सचिव को नहीं लिखा है।
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